सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार भारी दबाव में दिखाई दिया। बीएसई सेंसेक्स कारोबार की शुरुआत के साथ ही 600 अंक से ज्यादा टूट गया और बाद में गिरावट 700 अंक के पार पहुंच गई। वहीं एनएसई निफ्टी भी करीब 180 अंक फिसलकर कारोबार करता नजर आया। बाजार में शुरुआती बिकवाली से निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
एशियाई बाजारों में भी दिखा दबाव
भारत ही नहीं, एशिया के कई बड़े शेयर बाजारों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी दोनों ही शुरुआती कारोबार में कमजोर रहे। हालांकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन दिनभर बाजार दबाव में बने रहे। गिफ्ट निफ्टी में भी बड़ी गिरावट ने भारतीय बाजार के लिए पहले ही कमजोर संकेत दे दिए थे।
पाकिस्तान का बाजार सबसे ज्यादा टूटा
क्षेत्रीय बाजारों में सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान के शेयर बाजार पर देखने को मिला। KSE-100 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 1,700 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया। इससे साफ संकेत मिला कि वैश्विक तनाव का असर पूरे क्षेत्र के बाजारों पर एक साथ पड़ा है।
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क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार में इस कमजोरी की बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालात बिगड़ने, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती चिंताओं और तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से भी बाजार पर दबाव बढ़ा।
निवेशकों में बढ़ी सतर्कता
वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिसका असर शेयर बाजारों में बिकवाली के रूप में दिखाई दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
आगे किन बातों पर रहेगी नजर?
अब निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम पर रहेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है, लेकिन फिलहाल वैश्विक संकेत निवेशकों के लिए सतर्क रहने का इशारा कर रहे हैं।