दिल्ली की रोहिणी अदालत आज शाम 5:30 बजे गोवा नाइट क्लब अग्निकांड मामले में गिरफ्तार होने से बचने की कोशिश कर रहे क्लब मालिक गौरव और सौरभ लूथरा की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगी। गुरुवार को चली लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, वहीं मामले के सह-आरोपी अजय गुप्ता को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। इस हाई-प्रोफाइल केस में आरोपियों पर लाइसेंसिंग में अनियमितता, जांच से बचने और विदेश भागने जैसे गंभीर आरोप हैं।
लूथरा ब्रदर्स ने जताया जान का खतरा, वकील ने कहा– सरकारी मशीनरी कर रही प्रतिशोध
सुनवाई के दौरान लूथरा ब्रदर्स की ओर से उनके वकील ने कोर्ट में कहा कि उनके मुवक्किलों पर दवाब बनाया जा रहा है और बिना कानूनी प्रक्रिया के उनके परिसरों को सील और बुलडोज़ किए जाने की धमकी दी गई है। वकील ने दलील दी कि पूरा प्रशासनिक तंत्र बदले की भावना से काम कर रहा है और उनके मुवक्किलों को जान का खतरा है।
पुलिस का दावा: सभी लाइसेंस सौरभ के नाम, क्लब चला रहे थे बिना वैध अनुमति के
गोवा पुलिस की ओर से पेश हुए सरकारी वकील ने कोर्ट में लाइसेंस से जुड़े दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि क्लब के संचालन से संबंधित कई लाइसेंस प्रत्यक्ष रूप से सौरभ लूथरा के नाम पर थे। पुलिस के अनुसार FSSAI, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और GST लाइसेंस में लूथरा ब्रदर्स के नाम दर्ज थे, जबकि क्लब का पंचायत लाइसेंस पहले ही खत्म हो चुका था और उसे दोबारा रिन्यू भी नहीं कराया गया।
थाईलैंड भागने का आरोप, पुलिस बोली– हादसे के तुरंत बाद बुक की थी फ्लाइट
पुलिस ने कोर्ट को बताया कि आग की घटना के बाद आरोपी भाइयों ने रात 1:15 बजे थाईलैंड की फ्लाइट बुक की और वहीं से गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया। पुलिस का यह भी कहना है कि जब जांच टीम उनके घर पहुंची, तो परिवार ने आरोपियों की लोकेशन और फोन नंबर तक बताने से इनकार कर दिया। पुलिस के अनुसार, इससे स्पष्ट होता है कि आरोपी जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे, जिसके बाद लुकआउट नोटिस और इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया।
कोर्ट के सामने झूठी जानकारी देने का आरोप, एक ही एग्जिट वाला क्लब बना मौत का जाल
गोवा पुलिस ने कोर्ट में कहा कि लूथरा ब्रदर्स ने अधिकारियों और अदालत को गलत जानकारी देकर गुमराह किया। जांच में सामने आया कि क्लब में प्रवेश और निकासी के लिए केवल एक संकरा रास्ता था, और फायर शो जैसे जोखिम भरे कार्यक्रम बिना सुरक्षित इंतजाम के आयोजित किए जाते थे। पुलिस का कहना है कि ऐसी स्थितियों में उन्हें अग्रिम जमानत नहीं दी जानी चाहिए