Gold Buying Appeal : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील के बाद देशभर के ज्वेलरी कारोबार में चिंता बढ़ गई है। ज्वेलर्स, सुनार, कारीगर और छोटे कारोबारी मान रहे हैं कि इस अपील का असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब त्योहारी और शादी का सीजन करीब है, बाजार में मांग कमजोर होने का डर बढ़ गया है।
खपत में बड़ी गिरावट की आशंका
व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) का दावा है कि भारत में हर साल करीब 700 से 800 टन सोने की खपत होती है। संगठन का अनुमान है कि यदि खरीदारी को लेकर लोगों में हिचक बनी रही तो यह खपत घटकर लगभग 500 टन तक पहुंच सकती है। कारोबारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्तर पर की गई ऐसी अपीलें ग्राहकों के फैसलों को प्रभावित करती हैं।
शादी सीजन पर पड़ सकता है असर
अक्टूबर और नवंबर से शुरू होने वाले शादी सीजन को ज्वेलरी कारोबार का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। परिवार पहले से ही गहनों की खरीदारी की तैयारी शुरू कर देते हैं। ऐसे में बाजार से मिल रहे संकेत व्यापारियों की चिंता बढ़ा रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर ग्राहक खरीदारी टालते रहे तो बिक्री में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
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छोटे कारोबारियों पर ज्यादा दबाव
ज्वेलरी क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि सबसे ज्यादा असर छोटे दुकानदारों, सुनारों और कारीगरों पर पड़ता है। बड़े ब्रांड अपेक्षाकृत मजबूत वित्तीय स्थिति में होते हैं, लेकिन छोटे व्यापारियों की आय सीधे बिक्री पर निर्भर करती है। यदि बिक्री लगातार कमजोर रही तो रोजगार और कारोबार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।
बाजार में दिख रही सुस्ती
कई खुदरा कारोबारियों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या में भारी कमी आई है। लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि भविष्य में सोने के दाम कम हो सकते हैं, इसलिए वे खरीदारी को टाल रहे हैं। इसका असर नए ऑर्डर और स्टॉक खरीदने के फैसलों पर भी पड़ रहा है। बाजार में नकदी का प्रवाह धीमा होने से कारोबारियों की चिंता और बढ़ गई है।
उद्योग नई रणनीति की तलाश में
ज्वेलरी उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि मौजूदा हालात में कारोबार को संभालने के लिए नई रणनीतियों की जरूरत होगी। उद्योग जगत का कहना है कि सोना केवल आभूषण नहीं बल्कि भारतीय परिवारों के लिए बचत और परंपरा का भी हिस्सा है। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ग्राहकों का रुख क्या रहता है और बाजार इस चुनौती से कैसे उबरता है।