वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 के बीच देश में सोने की कुल मांग 10 प्रतिशत बढ़कर 151 टन पहुंच गई। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग में तेजी की वजह से देखने को मिली है। पिछले साल इसी अवधि में कुल मांग 137 टन थी, जिससे साफ है कि इस साल निवेशकों का भरोसा सोने पर और मजबूत हुआ है।
निवेश के तौर पर सोना बना पहली पसंद
रिपोर्ट में बताया गया है कि सोने की छड़ों, सिक्कों और ईटीएफ के जरिए निवेश मांग 54 प्रतिशत बढ़कर 82 टन हो गई। यह संकेत देता है कि लोग अब सोने को आभूषण के बजाय सुरक्षित निवेश के रूप में ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है।
आभूषण बाजार पर पड़ा असर
जहां निवेश में तेजी आई है, वहीं आभूषण की मांग में गिरावट दर्ज की गई। पहली तिमाही में ज्वेलरी की मांग 19 प्रतिशत घटकर 66 टन रह गई। इसका मुख्य कारण सोने की ऊंची कीमतें हैं, जिससे आम खरीदारों का बजट प्रभावित हुआ है। खासकर मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में खरीदारी कम हुई है।
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कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने की औसत कीमत 2026 की पहली तिमाही में 1,51,108 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई, जो पिछले साल के 83,375 रुपये के मुकाबले काफी ज्यादा है। कीमतों में इस उछाल ने बाजार के रुझान को पूरी तरह बदल दिया है और निवेश को बढ़ावा दिया है।
वैल्यू के लिहाज से मांग दोगुनी
मूल्य के आधार पर सोने की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। जनवरी से मार्च 2026 के दौरान कुल मांग का मूल्य करीब 2,27,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर लगभग 99 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। यह दिखाता है कि कम वॉल्यूम में भी ज्यादा वैल्यू का कारोबार हो रहा है।
आगे क्या रह सकता है रुझान
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो निवेश के तौर पर सोने की मांग और बढ़ सकती है। पूरे साल के लिए मांग 650 से 750 टन के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। कुल मिलाकर यह साफ है कि अब सोना सिर्फ गहनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निवेश का मजबूत विकल्प बन चुका है।