Gold Price Falls 26 Percent : साल 2026 में सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जनवरी में जहां सोना 5,595 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, वहीं अब इसकी कीमत करीब 4,129 डॉलर प्रति औंस रह गई है। यानी अपने उच्चतम स्तर से सोना लगभग 26 प्रतिशत सस्ता हो चुका है। ऐसे में कई लोग इसे खरीदारी का शानदार मौका मान रहे हैं, जबकि कुछ निवेशक अभी और गिरावट का इंतजार करने के पक्ष में हैं।
क्या अभी खरीदना सही फैसला होगा
सोने के मौजूदा स्तर को देखकर यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है कि क्या निवेशकों को अभी खरीदारी कर लेनी चाहिए या कुछ समय और रुकना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े निवेश से पहले गिरावट की वजह समझना जरूरी है। केवल कीमत कम होने के आधार पर फैसला लेना हमेशा सही रणनीति नहीं माना जाता।
रिपोर्ट में दिखा लंबी अवधि का भरोसा
टाटा म्यूचुअल फंड की अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में सोने और चांदी को लेकर सकारात्मक रुख देखने को मिला है। रिपोर्ट के मुताबिक हालिया गिरावट मांग में कमजोरी की वजह से नहीं आई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अभी भी एक महत्वपूर्ण एसेट बना हुआ है और मौजूदा गिरावट को केवल कीमतों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए।
ये भी पढ़ें : वोटिंग के बीच क्यों उठाया गया Humayun Kabir? गिरफ्तारी पर मचा सियासी बवाल
मजबूत डॉलर ने बढ़ाया दबाव लगातार
सोने की कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह डॉलर इंडेक्स की मजबूती मानी जा रही है। जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तब दूसरे देशों के निवेशकों के लिए सोना खरीदना महंगा पड़ता है। इसका सीधा असर वैश्विक मांग पर दिखाई देता है। यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों में डॉलर की मजबूती ने सोने पर दबाव बढ़ाया है।
ट्रेजरी यील्ड ने बदला निवेशकों का रुख
अमेरिका की ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी भी सोने की कमजोरी का बड़ा कारण बनी है। जब सरकारी बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तब निवेशक सोने जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों से पैसा निकालकर बॉन्ड की ओर रुख करने लगते हैं। इससे सोने की मांग घटती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
एक्सपर्ट्स की राय में छिपा संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा गिरावट मुख्य रूप से बाहरी आर्थिक कारणों से आई है, न कि सोने की मूल मांग में कमी की वजह से। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशक चरणबद्ध तरीके से खरीदारी पर विचार कर सकते हैं। हालांकि अल्पकालिक निवेशकों को वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर की चाल पर नजर बनाए रखनी चाहिए, क्योंकि आगे की दिशा काफी हद तक इन्हीं कारकों पर निर्भर करेगी।