पिछले एक साल में सोने की कीमतों में आई रिकॉर्ड तेजी का सीधा असर गोल्ड लोन पर पड़ा है। नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन में सालाना आधार पर करीब 125 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह ग्रोथ बैंकों के कुल लोन में हुई औसत 11.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी से कई गुना ज्यादा है। बीते साल भी गोल्ड लोन में करीब 77 प्रतिशत की तेजी देखी गई थी। फिलहाल कुल बैंक लोन में गोल्ड लोन का हिस्सा 2 प्रतिशत से भी कम है, लेकिन नए कर्जों में इसका योगदान 12 प्रतिशत तक पहुंच गया है। बीते 12 महीनों में गोल्ड लोन पोर्टफोलियो करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये बढ़ा है, जो बैंकों के लोन पैटर्न में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है।
लोग सोना गिरवी क्यों रख रहे हैं
बैंकों के मुताबिक गोल्ड लोन में इस उछाल के तीन बड़े कारण हैं। पहला कारण यह है कि बैंक अब सुरक्षित कर्ज देना ज्यादा पसंद कर रहे हैं और गोल्ड लोन इसमें सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। दूसरा बड़ा कारण सोने की कीमतों में भारी उछाल है, जिससे लोगों के पास उसी सोने के बदले ज्यादा रकम उधार लेने की क्षमता आ गई है। तीसरा कारण RBI के निर्देश हैं, जिनके बाद कुछ रिटेल लोन को गोल्ड लोन की श्रेणी में गिना जाने लगा है। लोगों के लिए भी यह आसान विकल्प बन गया है, क्योंकि इसमें कागजी कार्रवाई कम होती है और ब्याज दरें अन्य अनसिक्योर्ड लोन के मुकाबले कम रहती हैं।
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MSME और गोल्ड लोन बना ग्रोथ इंजन
गोल्ड लोन के साथ-साथ छोटे और मध्यम उद्योगों को दिए जाने वाले MSME लोन भी बैंकों की ग्रोथ का बड़ा आधार बनकर उभरे हैं। MSME सेक्टर का कुल बकाया लोन करीब 9.5 लाख करोड़ रुपये है, जो कुल बैंक लोन का लगभग 5 प्रतिशत है। लेकिन नए कर्जों में इनका हिस्सा भी करीब 12 प्रतिशत रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इस सेगमेंट में करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इन आंकड़ों से साफ है कि बैंक अब छोटे टिकट साइज के सुरक्षित और प्राथमिकता वाले लोन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं, जबकि बड़े कॉरपोरेट लोन से थोड़ा दूरी बना रहे हैं।
कॉरपोरेट और होम लोन की रफ्तार धीमी
बड़े उद्योगों का बैंक लोन लेने का रुझान लगातार कम हो रहा है। बड़ी कंपनियों का कुल बकाया लोन करीब 28.7 लाख करोड़ रुपये है, लेकिन नए कर्जों में इनका योगदान सिर्फ 3.6 प्रतिशत रहा। इसका मतलब है कि बड़ी कंपनियां या तो पुराने कर्ज चुका रही हैं या बॉन्ड मार्केट और आंतरिक कमाई से जरूरतें पूरी कर रही हैं। वहीं होम लोन भी कुल बकाया लोन का 16 प्रतिशत होने के बावजूद नए कर्जों में सिर्फ 14 प्रतिशत हिस्सा ही जोड़ पाए। कुल मिलाकर बैंक अब बड़े कर्जदारों के बजाय आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर ज्यादा भरोसा जता रहे हैं, जिससे आने वाले समय में बैंकिंग सेक्टर की रणनीति और जोखिम दोनों बदलते दिख सकते हैं।