अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब कमोडिटी बाजार में भी साफ दिखाई दे रहा है। सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे निवेशक असमंजस में हैं। गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना करीब 1,000 रुपये टूटकर 1,44,297 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई और इसका भाव लगभग 3,500 से 4,000 रुपये तक फिसलकर 2,22,813 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गया।
वैश्विक तनाव से बढ़ी बाजार की हलचल
कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण आने वाले दिनों में भी सोना और चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक घटनाक्रम और निवेशकों की धारणा इन दोनों कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। ऐसे माहौल में बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।
गिरावट को खरीदारी का मौका मान रहे विशेषज्ञ
केडिया एडवाइजरी के अनुसार, मौजूदा गिरावट को घबराने की बजाय निवेश के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। आमतौर पर जब सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आती है तो निवेशक निचले स्तर पर खरीदारी करना पसंद करते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश का फैसला जल्दबाजी में नहीं, बल्कि स्पष्ट रणनीति के साथ लेना चाहिए।
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एकमुश्त निवेश से बेहतर है SIP
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा अस्थिर बाजार में एक बार में बड़ी रकम लगाने के बजाय सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) बेहतर विकल्प हो सकता है। SIP के जरिए अलग-अलग स्तरों पर निवेश होने से खरीद की औसत लागत संतुलित रहती है। कीमतें कम होने पर अधिक यूनिट और बढ़ने पर कम यूनिट मिलती हैं, जिससे बाजार की अस्थिरता का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।
लंबी अवधि के निवेश पर रखें फोकस
जानकारों का कहना है कि सोना और चांदी में निवेश करने वालों को अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होना चाहिए। इतिहास बताता है कि भू-राजनीतिक संकटों के दौरान कीमतों में अस्थायी गिरावट जरूर आती है, लेकिन लंबी अवधि में सोने ने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। ऐसे में तीन से पांच वर्ष या उससे अधिक समय के निवेश लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना अधिक सुरक्षित और लाभदायक रणनीति मानी जा रही है।