
भारत में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू हुए आठ साल से अधिक समय हो गया है। लेकिन कई सेक्टर अब भी इसकी जटिलताओं से जूझ रहे हैं। इन्हीं में से एक है सराफा कारोबार, जहां दोहरे कराधान की समस्या व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए सिरदर्द बनी हुई है।
सरकार से उम्मीद थी कि हाल ही में घोषित जीएसटी सुधार 2.0 के तहत इस क्षेत्र को राहत दी जाएगी। खासकर मेकिंग चार्ज पर लगने वाले कर में कटौती या उसे समाप्त करने की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन सरकार के ताजा फैसलों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
दोहरे कराधान की मार
सराफा कारोबार में फिलहाल आभूषण की खरीद पर 3% जीएसटी और मेकिंग चार्ज (बनवाई) पर 5% जीएसटी देना पड़ता है। यानी ग्राहक को एक ही वस्तु पर दो बार टैक्स चुकाना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई व्यक्ति 1 लाख रुपये का सोना और 10,000 रुपये का मेकिंग चार्ज देता है, तो उसे 1 लाख पर 3,000 रुपये और चार्ज पर 500 रुपये जीएसटी देना होगा। यानी कुल 3,500 रुपये अतिरिक्त बोझ। यही वजह है कि कारोबारी इसे 'टैक्स ऑन टैक्स' कहते हैं।
मजदूरी पर टैक्स का सवाल
सराफा कारोबारियों का कहना है कि मेकिंग चार्ज असल में कारीगरों की मेहनत और कला की कीमत है। इसे मजदूरी माना जाना चाहिए, न कि टैक्स योग्य सेवा। 5% जीएसटी से उनकी आय पर सीधा असर पड़ता है और प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है। छोटे कारोबारियों का दावा है कि यही वजह है कि कई दुकानदार अब बिना बिल बिक्री करने या असंगठित व्यापार का रास्ता चुनने लगे हैं। इससे न केवल सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचता है, बल्कि ग्राहकों के विश्वास पर भी असर पड़ता है।
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उम्मीद अभी बाकी
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार ने अन्य क्षेत्रों जैसे कार, दवाई, आटा और होटल सेवाओं पर जीएसटी दरों में कटौती करके उपभोक्ताओं को राहत दी है। इसका सकारात्मक असर सोने-चांदी के बाजार पर भी अप्रत्यक्ष रूप से पड़ेगा। त्योहारों और शादियों के सीजन में लोगों की जेब हल्की होने से उनकी खरीदारी की क्षमता बढ़ेगी।
बिक्री में सुधार की आस
वहीं कई कारोबारियों का मानना है कि जीएसटी 2.0 से बाजार में मांग बढ़ने और बिक्री सुधार की संभावना है, जिससे अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। लेकिन साथ ही उनका ये भी कहना है कि अगर सरकार सोने और आभूषण निर्माण शुल्क पर 0.5–1% की भी कटौती कर देती, तो इस उद्योग को बड़ी राहत मिल जाती।
फिलहाल सराफा कारोबार सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहा है। सुधारों की इस नई कड़ी ने भले ही बाजार को आंशिक उम्मीद दी हो, लेकिन व्यापारी अब भी जीएसटी में वास्तविक राहत की राह देख रहे हैं।