दुनिया में बहुत से मंदिर अपनी भव्यता और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन तमिलनाडु का श्रीपुरम महालक्ष्मी मंदिर अपनी अनोखी सुनहरी आभा से हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। कहा जाता है कि यह मंदिर 15,000 किलो शुद्ध सोने से बना है, और दीपावली के अवसर पर यहां मां लक्ष्मी की विशेष आराधना होती है। हर साल हजारों भक्त यहां धन और समृद्धि का आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं, जहां पूरा मंदिर मानो ‘सोने की नगरी’ बन जाता है।
15 हजार किलो सोने से सजा स्वर्ण मंदिर
तमिलनाडु के वेल्लोर शहर के मलाईकोड़ी पहाड़ियों पर स्थित श्रीपुरम महालक्ष्मी मंदिर भारत के सबसे अमीर और भव्य मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर का निर्माण श्री नारायणी पीठम धर्मार्थ ट्रस्ट ने करवाया था। यह मंदिर पूरी तरह से सोने की चादरों से ढका हुआ है — दीवारें, गुंबद, द्वार और गर्भगृह तक सबकुछ स्वर्ण से मढ़ा गया है। माना जाता है कि इसे बनाने में करीब 300 करोड़ रुपये की लागत आई थी और निर्माण में 6 साल का समय लगा।
दिवाली पर होता है ‘स्वर्ण महोत्सव’
दीपावली के दिन श्रीपुरम महालक्ष्मी मंदिर का दृश्य किसी स्वर्ग से कम नहीं होता। पूरे परिसर को लाखों दीपों, फूलों और लाइटों से सजाया जाता है। मां लक्ष्मी की प्रतिमा को स्वर्ण आभूषणों और पुष्पों से सजाकर ‘महालक्ष्मी यज्ञ’ और ‘धन समृद्धि आरती’ का आयोजन होता है। भक्त मानते हैं कि दीपावली की रात इस मंदिर में पूजा करने से धन, सौभाग्य और सफलता की वर्षा होती है।
मंदिर की अनोखी बनावट और ‘मनोकामना सरोवर’
मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक पेश करती है। परिसर में एक विशेष सरोवर है जिसमें देश की सभी पवित्र नदियों का जल मिलाया गया है। इसे ‘मनोकामना पूर्ति जल’ कहा जाता है। श्रद्धालु इस जल को अपने जीवन में सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में ग्रहण करते हैं।
सोने और रोशनी से जगमगाती रात
दीपावली की रात जब मंदिर में दीपों की लौ सोने की दीवारों पर पड़ती है, तो पूरा परिसर मानो ‘सुनहरी आभा’ से नहा जाता है। मंदिर 365 दिन खुला रहता है, लेकिन दीपावली पर इसकी रौनक देखने लायक होती है। श्रद्धालु यहां केवल पारंपरिक वस्त्रों में प्रवेश कर सकते हैं, और विशेष पूजा के लिए बुकिंग अनिवार्य होती है।