
नए मलेरिया मोनोक्लोनल एंटीबॉडी को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। एक अध्ययन में सामने आया है कि इसका प्रयोग सुरक्षित है। कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है ये उन लोगों के लिए उपयोगी है, जिन्हें पहले कभी मलेरिया नहीं हुआ। पता चला है कि मलेरिया-नेव तीन वयस्कों को हाई डोज दी गई, और पाया गया कि इनमें से किसी के भी ब्लडस्ट्रीम में 26 सप्ताह बाद तक परजीवी नहीं थे।
बीमारी के खिलाफ इम्युनिटी डेवलप नहीं हुई
मलेरिया-नेव शब्द उस व्यक्ति जुड़ते है, जिसे कभी मलेरिया नहीं हुआ और इसलिए उसमें इस बीमारी के खिलाफ इम्युनिटी डेवलप नहीं हुई है। मैरीलैंड विश्वविद्यालय में वैक्सीन विकास और वैश्विक स्वास्थ्य केंद्र के लेखक प्रोफेसर कर्स्टन ई. लाइक का कहना है कि नए टीके उपलब्ध हैं, लेकिन इनके प्रभाव को लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
सुरक्षा प्रदान करने के क्लिनीकल प्रूफ थे
कंट्रोल्ड ह्यूमन इंफेक्शन मॉडल का प्रयोग मलेरिया-नेव लोगों पर किया गया। एमएएमओ1 का डोज बर्दाश्त करने योग्य था। सेफ्टी टारगेट को पूरा करता था और इसमें मलेरिया से सुरक्षा प्रदान करने के क्लिनीकल प्रूफ थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों की मानें तो मलेरिया ने दुनिया भर में अनुमानित 263 मिलियन लोगों पर असर डाला है। 2023 में 597,000 लोगों की मृत्यु का कारण बना। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चे विशेष रूप से असुरक्षित हैं, और मलेरिया संबंधित मौत का सबसे बड़ा अनुपात इन्हीं में है।