Govardhan Puja 2026: दीपावली के बाद गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा को याद किया जाता है और गोवर्धन महाराज की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर घर के आंगन या पूजा स्थल पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का स्वरूप बनाया जाता है। इस अवसर पर अन्नकूट का आयोजन भी किया जाता है। इस साल दीपावली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। इसके बाद गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है। आइए जानते हैं पंचांग के अनुसार 2026 में गोवर्धन पूजा किस दिन होगी और इस दिन पूजा किस तरह की जाती है।
2026 में कब है गोवर्धन पूजा?
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर गोवर्धन पूजा की जाती है। इस बार प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे शुरू होगी और 10 नवंबर को दोपहर 2 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर इस वर्ष 10 नवंबर 2026 को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गोवर्धन पर्वत, भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन महाराज की श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है।
गोवर्धन पूजा कैसे करें?
गोवर्धन पूजा के लिए सबसे पहले घर के आंगन या किसी साफ स्थान पर गाय के गोबर से गोवर्धन पर्वत का आकार बनाया जाता है। इसके आसपास गाय, बछड़े और ग्वाल-बालों की आकृतियां भी बनाई जा सकती हैं। पूजा के समय दीपक और धूप जलाकर गोवर्धन महाराज का पूजन करें। इसके बाद खील, बताशे, मिठाई और विभिन्न प्रकार के पकवान अर्पित किए जाते हैं। कई जगहों पर भगवान को 56 भोग लगाने की परंपरा भी है। पूजा पूरी होने के बाद गोवर्धन महाराज की परिक्रमा करें और आरती करें। अंत में भगवान से जाने-अनजाने हुई भूल के लिए क्षमा मांगें। पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद को परिवार के लोगों में बांटकर ग्रहण किया जाता है।
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गोवर्धन पूजा के पीछे क्या है पौराणिक कथा?
गोवर्धन पूजा से जुड़ी कथा भगवान श्रीकृष्ण और ब्रजवासियों से संबंधित है। मान्यता के अनुसार ब्रज में लोग अच्छी बारिश और खेती के लिए इंद्रदेव की पूजा किया करते थे। वे इंद्र की प्रसन्नता के लिए तरह-तरह के पकवान और अनाज अर्पित करते थे। एक बार श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा कि उन्हें प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि इसी से उन्हें पशुओं के लिए चारा और जीवन के लिए जरूरी संसाधन मिलते हैं। ब्रजवासियों ने कृष्ण की बात मानकर इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत का पूजन किया। इससे इंद्रदेव नाराज हो गए और उन्होंने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी। लगातार वर्षा से ब्रजवासी परेशान हो उठे। तब श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सभी ब्रजवासियों तथा उनके पशुओं को उसके नीचे सुरक्षित स्थान दिया। कई दिनों तक ब्रजवासियों की रक्षा करने के बाद इंद्रदेव को अपनी भूल का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने श्रीकृष्ण से क्षमा मांगी। मान्यता है कि इसी घटना की स्मृति में हर वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।