मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की मोहन सरकार को बनने को दो साल पूरे होने जा रहे हैं। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मंत्री-विधायकों से 20 महीने का हिसाब लेने वाले हैं। सीएम डॉ यादव विभागवार समीक्षा करेंगे और वन टू वन बैठकें कर सरकार की योजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन करेंगे। साथ ही भविष्य के मंत्रिमंडल विस्तार पर भी फैसला किया जाएगा। सरकार की कार्यशैली को और प्रभावी बनाने के लिए यह अहम पहल मानी जा रही है।
वन टू वन बैठक से होगी कार्यकुशलता का मूल्यांकन
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा मंत्री-विधायकों से वन टू वन बैठकें कर उनके कार्यों की बारीकी से समीक्षा की जाएगी। यह बैठकें अक्टूबर में आयोजित की जाएंगी। बैठक के दौरान मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों के दौरे, चल रही योजनाओं की प्रगति, रात्रि विश्राम व चौपाल लगाने की रिपोर्ट, विभागीय नवाचार और अधिकारी-कार्यकर्ता के साथ तालमेल पर चर्चा करेंगे। यह प्रक्रिया सरकार के पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
रोडमैप और भविष्य की योजना पर विशेष ध्यान
सीएम डॉ मोहन यादव दो और चार साल का रोडमैप भी समीक्षा करेंगे। मंत्रियों को चार साल के रोडमैप पर काम करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं। अब इस रोडमैप के तहत चल रही योजनाओं की समीक्षा से स्पष्ट होगा कि सरकार ने जनता से किए गए वादों को किस हद तक पूरा किया है। इसके अलावा, भविष्य में मंत्रिमंडल विस्तार की भी रूपरेखा तैयार की जाएगी। मंत्रियों और विधायकों के कामकाज के आधार पर निर्णय लिया जाएगा कि नए चेहरों को शामिल किया जाए या नहीं।
प्रशासनिक कार्यशैली को होगा मजबूत आधार
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस समीक्षा प्रक्रिया के तहत अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ व्यवहार, तालमेल और कार्य निष्पादन की गुणवत्ता को भी परखेंगे। इसका उद्देश्य शासन में बेहतर समन्वय और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना है। इस तरह की समीक्षा सरकार की कार्यशैली को नया आयाम देगी और शासन-प्रशासन में जवाबदेही का स्तर बढ़ेगा।