पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारतीय विमानन क्षेत्र पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बढ़ती ईंधन कीमतों और ऑपरेटिंग कॉस्ट ने एयरलाइन कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बना दिया है। इसी संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा राहत पैकेज देने का फैसला किया है, ताकि उड़ानों का संचालन प्रभावित न हो और कंपनियों को नकदी संकट से उबारा जा सके।
कैबिनेट बैठक में मिली मंजूरी
नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में एयरलाइन सेक्टर के लिए 5,000 करोड़ रुपये के विशेष प्रावधान को मंजूरी दी गई। यह सहायता इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम यानी ECLGS 5.0 के तहत दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य विमानन कंपनियों को तत्काल वित्तीय राहत देना है।
एयरलाइंस को कैसे मिलेगा फायदा
इस स्कीम के तहत एयरलाइन कंपनियों को उनकी पीक वर्किंग कैपिटल के बराबर अतिरिक्त कर्ज लेने की सुविधा मिलेगी। हालांकि प्रति एयरलाइन यह सीमा अधिकतम 1,500 करोड़ रुपये तय की गई है। खास बात यह है कि सरकार इस कर्ज पर 90 प्रतिशत तक की क्रेडिट गारंटी देगी और इसके लिए कोई गारंटी फीस भी नहीं ली जाएगी।
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कर्ज चुकाने में भी बड़ी राहत
सरकार ने एयरलाइंस को राहत देने के लिए लोन की अवधि भी आसान रखी है। कंपनियों को सात साल तक का समय मिलेगा और शुरुआती दो वर्षों तक उन्हें कोई किस्त नहीं चुकानी होगी। इस योजना का लाभ वही एयरलाइंस उठा सकेंगी जिनके खाते 31 मार्च 2026 तक एनपीए घोषित नहीं हुए हों।
IndiGo और Air India पर बढ़ा दबाव
हाल के महीनों में IndiGo और Air India जैसी बड़ी एयरलाइंस ने ईंधन लागत बढ़ने के कारण फ्यूल सरचार्ज बढ़ाया है और कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती भी की है। ऐसे में सरकार का यह कदम विमानन उद्योग के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे न केवल उड़ानों की निरंतरता बनी रहेगी बल्कि रोजगार और सप्लाई चेन पर पड़ने वाले असर को भी कम किया जा सकेगा।