Government Bond Interest Rate : सरकारी बॉन्ड में पैसा लगाने वाले निवेशकों के लिए अहम बदलाव हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भारत सरकार फ्लोटिंग रेट बॉन्ड 2033 की नई ब्याज दर तय कर दी है। 22 सितंबर 2026 से 21 मार्च 2027 तक इस बॉन्ड पर 6.87 प्रतिशत सालाना ब्याज मिलेगा। इससे पहले छह महीने की अवधि में ब्याज दर 6.75 प्रतिशत थी। यानी नई दर में 0.12 प्रतिशत यानी 12 आधार अंक की बढ़ोतरी हुई है।
छह महीने के लिए बदली दर
फ्लोटिंग रेट बॉन्ड की खासियत यह है कि इसकी ब्याज दर हमेशा एक जैसी नहीं रहती। इसे तय अंतराल पर दोबारा तय किया जाता है। इस बार नई दर 22 सितंबर से लागू होकर अगले छह महीने तक चलेगी। इसका मतलब है कि इस अवधि में बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज 6.87 प्रतिशत सालाना की दर से तय होगा।
ब्याज दर तय कैसे होती है
इस बॉन्ड की ब्याज दर एक तय फॉर्मूले के आधार पर तय होती है। इसके लिए 182 दिन वाले सरकारी ट्रेजरी बिल की पिछली तीन नीलामियों की औसत भारित उपज को आधार बनाया जाता है। इसमें 1.22 प्रतिशत का तय अंतर भी जोड़ा जाता है। इसी गणना के बाद इस बार 6.87 प्रतिशत की दर सामने आई है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब
नई दर बढ़ने का सीधा मतलब है कि इस अवधि के लिए बॉन्ड रखने वाले निवेशकों को पहले की तुलना में ज्यादा ब्याज दर मिलेगी। हालांकि, केवल ब्याज दर देखकर किसी निवेश को बेहतर या खराब नहीं माना जा सकता। निवेश से पहले उसकी अवधि, खरीद मूल्य, कर और पैसे की जरूरत जैसे पहलुओं को समझना जरूरी है। अगर कोई निवेशक इस बॉन्ड को बाजार में उसके मूल मूल्य से ज्यादा या कम कीमत पर खरीदता है, तो उसका वास्तविक लाभ 6.87 प्रतिशत से अलग हो सकता है।
इसे भी पढ़ें : 2.30 लाख परिवारों की बदलेगी तस्वीर, छत से बनेगी अपनी बिजली
घर बैठे भी खरीदा जा सकता है बॉन्ड
खुदरा निवेशक सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की रिटेल डायरेक्ट सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके जरिए पात्र सरकारी प्रतिभूतियों में प्राथमिक और द्वितीयक बाजार के माध्यम से निवेश किया जा सकता है। इसके लिए निवेशक को रिटेल डायरेक्ट खाता खोलना होता है। नई ब्याज दर ऐसे समय में आई है जब सुरक्षित निवेश विकल्पों पर मिलने वाली कमाई को लेकर निवेशकों की नजर बनी हुई है। हालांकि, निवेश करने से पहले बॉन्ड की पूरी शर्तें और अपनी जरूरत जरूर समझनी चाहिए।