इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान से जुड़े दो पैन कार्ड मामले में तीनों याचिकाओं पर सुनवाई पूरी कर ली है। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस समित गोपाल की एकल पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। वहीं, राज्य सरकार ने दोनों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद करने की मांग की है।
दोनों की सजा के खिलाफ दाखिल हैं याचिकाएं
आजम खान ने अपनी दोषसिद्धि और 10 साल की सजा को चुनौती देते हुए क्रिमिनल रिवीजन याचिका दाखिल की है। वहीं, अब्दुल्ला आजम ने सात साल की सजा के खिलाफ अलग याचिका दायर की है। हाईकोर्ट इन दोनों याचिकाओं के साथ राज्य सरकार की ओर से दाखिल सजा बढ़ाने की याचिका पर भी सुनवाई कर रहा है।
राज्य सरकार ने मांगी उम्रकैद की सजा
राज्य सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले के तहत मिली सजा को बढ़ाकर आजीवन कारावास करने की मांग की है। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम के वकीलों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया है। सरकार की मांग पर अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।
आजम खान ने खुद को गलत तरीके से फंसाने का आरोप लगाया
आजम खान की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उन्हें भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी के तहत आपराधिक साजिश के मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। उनके पक्ष ने कहा कि साजिश में उनकी संलिप्तता साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं। आजम खान ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को रद्द करने की मांग की है।
2019 में दर्ज हुई थी दो पैन कार्ड की शिकायत
यह मामला दिसंबर 2019 में दर्ज शिकायत से जुड़ा है। भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैन कार्ड हैं। शिकायत के मुताबिक, दोनों कार्डों में जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और 30 सितंबर 1990 दर्ज थी। इसी मामले में निचली अदालत ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें हैं।