हाल ही में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दलदल में मौत की घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने आपदा प्रबंधन व्यवस्था की गहन समीक्षा की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर ठोस कदम उठाए जाएंगे। प्रिंसिपल सेक्रेटरी (राजस्व) अपर्णा यू ने SDRF और NDRF अधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा प्रबंधन की खामियों पर चर्चा की।
हाई-टेक रेस्क्यू उपकरणों को शामिल करने पर जोर
बैठक में यह निर्देश दिए गए कि पुलिस, दमकल विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया जाए। सबसे अहम बात यह कही गई कि किसी भी आपात स्थिति में रेस्पॉन्स टाइम को कम करना होगा, ताकि पीड़ितों को समय पर मदद मिल सके। बैठक में यह भी तय किया गया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर इंटीग्रेटेड डिज़ास्टर कंट्रोल सेंटर को मजबूत बनाया जाएगा। इसमें रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग, ड्रोन सर्विलांस और हाई-टेक रेस्क्यू उपकरणों को शामिल करने पर जोर दिया गया।
आपदा प्रबंधन टीमों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जिलों में मौजूद आपदा प्रबंधन टीमों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाए और मॉक ड्रिल्स कराई जाएं।
नोएडा हादसे में युवराज मेहता करीब 80 मिनट तक मदद का इंतजार करते रहे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। इस घटना ने आपदा प्रबंधन की कमजोरियों को उजागर कर दिया। सरकार का मानना है कि यदि विभागों के बीच बेहतर तालमेल और तेज़ रेस्पॉन्स होता तो शायद युवराज की जान बचाई जा सकती थी।