UP News: आगरा में औषधि विभाग की टीम ने एक निजी मेडिकल एजेंसी पर छापेमारी कर बड़ा खुलासा किया है। यहां सरकारी अस्पतालों या योजनाओं के लिए दी जाने वाली दवाएं बरामद हुईं, जो निजी बिक्री के लिए प्रतिबंधित हैं। सूचना मिलते ही सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय के नेतृत्व में टीम ने तत्काल कार्रवाई की और एजेंसी पर ताला जड़ दिया।
सटीक आंकड़ा जांच के बाद सामने आएगा
छापेमारी के दौरान एजेंसी से बड़ी मात्रा में ऐसी दवाएं मिलीं, जिन पर 'नॉट फॉर सेल' या सरकारी सप्लाई की मुहर लगी हुई थी। ये दवाएं सरकारी अस्पतालों, आयुष्मान भारत योजना या अन्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए आरक्षित होती हैं। इनका निजी बाजार में बिकना गंभीर अनियमितता है, जो मरीजों के हितों पर सीधा असर डालता है। विभागीय सूत्रों के अनुसार दवाओं की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है, लेकिन सटीक आंकड़ा जांच के बाद सामने आएगा।
सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई
सहायक आयुक्त अतुल उपाध्याय ने बताया कि सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। एजेंसी के संचालक से पूछताछ की जा रही है और दवाओं के स्रोत का पता लगाया जा रहा है। संभव है कि ये दवाएं सरकारी स्टॉक से चोरी होकर या अनुचित तरीके से यहां पहुंची हों। प्रतिष्ठान को पूरी तरह सील कर दिया गया है और सभी रिकॉर्ड जब्त कर लिए गए हैं। विभाग ने मामले की गहन जांच के आदेश दिए हैं। सैंपल लैब भेजे जाएंगे और सप्लाई चेन की पूरी पड़ताल की जाएगी।
संलिप्तता पाई गई तो सख्त कार्रवाई होगी
यदि सरकारी कर्मियों की संलिप्तता पाई गई तो सख्त कार्रवाई होगी। यह घटना आगरा के दवा बाजार में चल रही अनियमितताओं की ओर इशारा करती है, जहां पहले भी नकली और अवैध दवाओं के मामले सामने आ चुके हैं। मरीजों से अपील की गई है कि दवाएं हमेशा विश्वसनीय स्रोत से ही खरीदें और संदिग्ध मामले की शिकायत तुरंत करें। विभाग का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयां लगातार जारी रहेंगी ताकि अवैध दवा कारोबार पर अंकुश लगाया जा सके।