उत्तर प्रदेश सरकार की तबादला नीति पर मेरठ के सहकारिता विभाग में सवाल उठने लगे हैं। शासन द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के बावजूद एक अधिकारी को करीब एक माह बीत जाने के बाद भी कार्यमुक्त (रिलीव) नहीं किया गया है। इससे विभागीय कार्यप्रणाली और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि कई विभागों में भी इस तरह के मामले लंबित है।
अमरोहा हुआ था स्थानांतरण
जानकारी के अनुसार, शासन ने 30 मई 2026 को जारी आदेश के तहत सहकारी निरीक्षक वर्ग-1 एवं अपर जिला सहकारी अधिकारी अशोक कुमार का स्थानांतरण मेरठ से अमरोहा कर दिया था। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि संबंधित अधिकारी को तत्काल कार्यमुक्त कर नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही स्थानांतरण अवधि में किसी भी प्रकार का अवकाश स्वीकृत न किए जाने का भी उल्लेख किया गया था।
एक माह बाद भी नहीं हुए रिलीव
शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अशोक कुमार को अभी तक मेरठ से कार्यमुक्त नहीं किया गया है। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी आज भी मेरठ में ही कार्यरत हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में शासन के आदेशों को नजरअंदाज किया जा रहा है। विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि सामान्य कर्मचारियों से शासन के आदेशों का तत्काल पालन कराया जाता है, तो फिर अधिकारियों के मामले में अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है। इससे शासन की स्थानांतरण नीति की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
आदेशों की अनदेखी
अब देखना यह होगा कि सहकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हैं या नहीं। यदि जल्द ही स्थानांतरण आदेश का पालन नहीं कराया गया, तो यह मामला शासन स्तर तक पहुंच सकता है। फिलहाल मेरठ के सहकारिता विभाग में शासन के आदेशों की अनदेखी चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं अधिकारियों से बात करने पर कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता विभाग अमित त्यागी ने बताया कि सहकारी निरीक्षक वर्ग-1 एवं अपर जिला सहकारी अधिकारी अशोक कुमार का स्थानांतरण करीब एक माह पहले हो चुका था। हालांकि, पारिवारिक कारणों के चलते उन्होंने स्थानांतरण के संबंध में विभाग को प्रत्यावेदन दिया था, जिसे विचारार्थ लखनऊ भेजा गया है। विभाग से निर्णय आने तक उन्हें फिलहाल प्रतीक्षारत रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि जिले में स्टाफ की कमी के कारण भी वैकल्पिक व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है। वहीं, जब इस पूरे मामले को लेकर डीआर विकास नेहरा से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने इस संबंध में किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।