Government Advertising Spending RTI : सरकारी योजनाओं के प्रचार पर होने वाले खर्च को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। अब सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मिली जानकारी और राज्यसभा में दिए गए जवाब से पता चला है कि वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच 10 प्रमुख योजनाओं और अभियानों के विज्ञापन पर कुल 54.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इस खुलासे के बाद सरकारी प्रचार पर होने वाले खर्च की चर्चा तेज हो गई है।
इन योजनाओं के प्रचार पर खर्च हुए करोड़ों
आंकड़ों के अनुसार सरकार की कई प्रमुख योजनाओं के प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इनमें पीएम विश्वकर्मा योजना और पीएम इंटर्नशिप योजना प्रमुख हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना के प्रचार पर करीब 7.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि पीएम इंटर्नशिप योजना के लिए 12.6 करोड़ रुपये का बजट विज्ञापनों पर लगाया गया। इन दोनों योजनाओं को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के लिए विभिन्न माध्यमों का इस्तेमाल किया गया।
GST बचत उत्सव पर सबसे ज्यादा खर्च
खर्च के आंकड़ों में सबसे बड़ा हिस्सा GST बचत उत्सव अभियान का रहा। जानकारी के मुताबिक इस अभियान के प्रचार पर लगभग 27.1 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह राशि अन्य योजनाओं की तुलना में सबसे अधिक है। सरकार का उद्देश्य इस अभियान के जरिए लोगों को जीएसटी से जुड़े लाभ और जागरूकता संदेशों तक पहुंचाना था।
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प्रचार के लिए अपनाए गए कई माध्यम
सरकार ने योजनाओं के प्रचार के लिए सिर्फ एक माध्यम पर निर्भरता नहीं दिखाई। टीवी, रेडियो, सिनेमा हॉल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स समेत कई माध्यमों का उपयोग किया गया। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए अलग-अलग वर्गों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचाने की कोशिश की गई ताकि अधिक से अधिक लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें।
प्रिंट मीडिया को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
खर्च के वितरण पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा राशि प्रिंट मीडिया पर खर्च की गई। कुल विज्ञापन बजट का 58.8 प्रतिशत हिस्सा अखबारों और प्रिंट माध्यमों पर लगाया गया। इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को 19.5 प्रतिशत हिस्सा मिला। डिजिटल मीडिया पर 14.6 प्रतिशत खर्च किया गया, जबकि आउटडोर विज्ञापनों जैसे होर्डिंग्स और बैनरों पर 7.2 प्रतिशत राशि खर्च की गई।
क्यों जरूरी माना जाता है विज्ञापन अभियान?
सरकार का कहना है कि योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए विज्ञापन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार पात्र लाभार्थियों को योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे वे लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में प्रचार अभियानों के जरिए जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की जाती है। हालांकि, विज्ञापनों पर होने वाले खर्च को लेकर समय-समय पर बहस भी होती रही है। RTI से सामने आए ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर सरकारी प्रचार पर होने वाले खर्च को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।