UP News: योगी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी यू-डायस प्लस 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में कक्षा 3 से 5 (प्रिपरेटरी स्तर) तक ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। इसका मतलब है कि इस स्तर पर कोई भी बच्चा पढ़ाई बीच में नहीं छोड़ रहा है।
23-24 में थी ड्रॉपआउट दर 5.4 प्रतिशत
यह उपलब्धि योगी सरकार की शिक्षा सुधार योजनाओं का साक्षात प्रमाण है। पिछले साल 2023-24 में कक्षा 3-5 स्तर पर ड्रॉपआउट दर 5.4 प्रतिशत थी, जो अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। उत्तर प्रदेश अब दिल्ली, महाराष्ट्र, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां इस स्तर पर ड्रॉपआउट शून्य दर्ज किया गया है। यह बदलाव न केवल प्राथमिक स्तर, बल्कि उच्च प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भी दिखाई दे रहे हैं।
मिडिल स्तर पर ड्रॉपआउट दर महज 3 प्रतिशत
कक्षा 6 से 8 (मिडिल स्तर) पर ड्रॉपआउट दर अब महज 3 प्रतिशत रह गई है। यह 2022-23 में 16 प्रतिशत और 2023-24 में 3.9 प्रतिशत से काफी कम है। इससे स्पष्ट है कि बच्चे स्कूल में लगातार बने रह रहे हैं और शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित हो रही है।
माध्यमिक स्तर पर भी सुधार हुआ
माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 से 12) पर भी सुधार हुआ है। 2024-25 में कुल ड्रॉपआउट दर घटकर 2.8 प्रतिशत हो गई है, जबकि 2023-24 में यह 5.9 प्रतिशत और 2022-23 में 12.7 प्रतिशत थी। लिंग आधारित आंकड़ों में भी संतुलन नजर आता है। कक्षा 6-8 में लड़कों की ड्रॉपआउट दर 2.9 प्रतिशत और लड़कियों की 3.1 प्रतिशत है। वहीं कक्षा 9-10 (या माध्यमिक) में लड़कों की दर 8.7 प्रतिशत (कुछ स्रोतों में कुल माध्यमिक पर लड़कों के लिए अधिक) और लड़कियों की 5.1 प्रतिशत दर्ज की गई है, हालांकि कुल माध्यमिक स्तर पर लड़कियां बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं (कुछ रिपोर्टों में लड़कियों की दर 1.5 प्रतिशत तक कम)।
लड़कों की तुलना में लड़कियों का ड्रॉपआउट कम
कुल मिलाकर, माध्यमिक स्तर पर लड़कों की तुलना में लड़कियों का ड्रॉपआउट कम है, जो लड़कियों की शिक्षा पर फोकस का परिणाम है।योगी सरकार की योजनाएं जैसे स्कूलों में बेहतर सुविधाएं, मिड-डे मील, छात्रवृत्ति, शिक्षक प्रशिक्षण और अभिभावक जागरूकता अभियान ने इस सफलता में अहम भूमिका निभाई है। ग्रॉस एनरोलमेंट रेशियो में भी सुधार हुआ है। प्रिपरेटरी स्तर पर 90.6 प्रतिशत, मिडिल पर 83.9 प्रतिशत और सेकेंडरी पर 60.9 प्रतिशत तक पहुंचा है।
तीन साल में 11 हजार नए स्कूल खुले
पिछले तीन सालों में प्रदेश में शिक्षा ढांचे का तेजी से विस्तार हुआ है। स्कूलों की संख्या 2.51 लाख से बढ़कर 2.62 लाख हो गई। मतलब तीन साल में 11 हजार नए स्कूल खुले। शिक्षकों की संख्या भी 14.7 लाख से बढ़कर 16.15 लाख तक पहुंच गई है। वहीं नामांकन 4.16 करोड़ से बढ़कर 4.27 करोड़ हो गया। अब औसतन हर स्कूल में 163 बच्चे और 6 शिक्षक हैं। जबकि इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2022-23 में 166 बच्चों पर 6 टीचर थे।
शिक्षा के नए दौर में प्रवेश कर चुका
संदीप सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री, उत्तर प्रदेश ने कहा कि यू-डायस प्लस 2024-25 की रिपोर्ट इस बात की गवाही है कि उत्तर प्रदेश अब शिक्षा के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। प्राथमिक स्तर पर शून्य ड्रॉपआउट और उच्च कक्षाओं में तेजी से घटती दर यह संकेत है कि आने वाले वर्षों में प्रदेश का भविष्य पहले से कहीं अधिक सशक्त और शिक्षित होगा।