Govt UPS Scheme: केंद्र सरकार द्वारा कर्मचारियों के लिए शुरू की गई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लागू हुए एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन यह योजना अपेक्षित लोकप्रियता हासिल नहीं कर सकी है। संसद में पेश किए गए ताजा आंकड़ों से पता चला है कि बड़ी संख्या में केंद्रीय कर्मचारियों ने इस विकल्प को अपनाने में रुचि नहीं दिखाई। सरकार ने इसे राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के विकल्प के रूप में पेश किया था, लेकिन अब तक इसकी स्वीकार्यता सीमित रही है।
क्या है यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS)?
केंद्र सरकार ने अगस्त 2024 में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को मंजूरी दी थी और इसे 1 अप्रैल 2025 से लागू किया गया। यह योजना राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) के अंतर्गत एक वैकल्पिक व्यवस्था है। UPS का उद्देश्य कर्मचारियों को निश्चित पेंशन का भरोसा देना है, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। हालांकि, योजना लागू होने के बाद भी अधिकांश कर्मचारियों ने NPS में ही बने रहना उचित समझा।
संसद में पेश हुए आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
संसद में वित्त मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, 19 जुलाई 2026 तक केवल 1,18,195 केंद्रीय कर्मचारियों ने UPS को चुना। यह संख्या NPS के लगभग 27.6 लाख केंद्रीय सरकारी सब्सक्राइबर्स का केवल 4.3 प्रतिशत है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कर्मचारियों का बड़ा वर्ग अभी भी NPS को प्राथमिकता दे रहा है। सरकार ने UPS चुनने की समयसीमा भी कई बार बढ़ाई, लेकिन इसके बावजूद योजना को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल सका।
वित्त मंत्री ने क्या कहा?
राज्यसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सरकार के पास UPS में किसी तरह का संशोधन करने या इसे वापस लेने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार का कहना है कि यह योजना कर्मचारियों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है और इसे जारी रखा जाएगा।
UPS में मिलते हैं ये प्रमुख लाभ
यूनिफाइड पेंशन स्कीम के तहत 25 वर्ष की पात्र सेवा पूरी करने वाले कर्मचारी को सेवानिवृत्ति से पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत गारंटीड पेंशन मिलती है। कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को पेंशन का 60 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान है। वहीं, कम से कम 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम 10,000 रुपये मासिक पेंशन का लाभ मिलता है। इसके अलावा ग्रेच्युटी के साथ सेवानिवृत्ति के समय एकमुश्त भुगतान की सुविधा भी दी जाती है। बावजूद इसके, संसद में पेश हुए ताजा आंकड़े बताते हैं कि योजना अभी तक कर्मचारियों का व्यापक भरोसा जीतने में सफल नहीं हो सकी है।