कभी ग्वालियर और शिवपुरी के विशाल घास मैदानों की पहचान रही दुर्लभ सोन चिरैया अब एक बार फिर अपनी पुरानी धरती पर लौट सकती है। वर्ष 1994 के बाद क्षेत्र से पूरी तरह गायब हो चुके इस संकटग्रस्त पक्षी को दोबारा बसाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। इसके लिए 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष ग्रासलैंड विकसित करने की योजना तैयार की गई है, जहां इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण, प्रजनन और सुरक्षित आवास की व्यवस्था की जाएगी।
32 साल पहले खत्म हो गई थी मौजूदगी
ग्वालियर और शिवपुरी के घास के मैदान कभी सोन चिरैया का प्रमुख प्राकृतिक आवास हुआ करते थे। लेकिन बदलते पर्यावरणीय हालात और प्राकृतिक आवासों में कमी के कारण यह पक्षी धीरे-धीरे क्षेत्र से लुप्त हो गया। वर्ष 1994 के बाद घाटीगांव और तिघरा क्षेत्र में इसकी मौजूदगी दर्ज नहीं की गई। अब इसे दोबारा स्थापित करने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू की जा रही है।
4000 हेक्टेयर में विकसित होगा ग्रासलैंड
योजना के तहत घाटीगांव और तिघरा अभयारण्य के चयनित हिस्सों को मिलाकर लगभग 4000 हेक्टेयर क्षेत्र में विशेष ग्रासलैंड तैयार किया जाएगा। इस क्षेत्र को इस तरह विकसित किया जाएगा कि सोन चिरैया को प्राकृतिक आवास, पर्याप्त भोजन और सुरक्षित प्रजनन का वातावरण मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि उपयुक्त आवास तैयार होने से इस पक्षी की संख्या बढ़ाने में मदद मिलेगी।
बारिश के बाद शुरू होगा मेगा प्रोजेक्ट
वन विभाग के अनुसार इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद की जाएगी। प्रारंभिक चरण में भूमि विकास, घास प्रबंधन और संरक्षण संबंधी आवश्यक व्यवस्थाएं की जाएंगी। इसके बाद पक्षियों को बसाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
जैसलमेर से लाए जाएंगे अंडे
परियोजना के तहत राजस्थान के जैसलमेर से सोन चिरैया के अंडे लाने की योजना बनाई गई है। इन अंडों को विशेष हैचिंग सेंटर में सुरक्षित तरीके से विकसित किया जाएगा। चूजों के जन्म के बाद उन्हें नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में तैयार किया जाएगा, ताकि वे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुकूल हो सकें।
संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक पक्षी की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। यदि योजना सफल होती है तो ग्वालियर और शिवपुरी के घास मैदान एक बार फिर सोन चिरैया की चहलकदमी से गुलजार हो सकेंगे।