लखनऊ। नीट परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। देशभर में एमबीबीएस की 15,000 नई सीटें इस सत्र के लिए बढ़ा दी गई हैं। केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की नवीनतम घोषणा के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए देश भर में एमबीबीएस की 15,000 नई सीटें जोड़ी गई हैं। इसके साथ ही देश में कुल एमबीबीएस सीटों की संख्या लगभग 1.37 लाख के पार पहुंच गई है। यह वृद्धि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जहां से प्रतिवर्ष देश में सबसे अधिक छात्र नीट परीक्षा में शामिल होते हैं।
यूपी के छात्रों के लिए बढ़े अवसर
उत्तर प्रदेश में 'एक जिला - एक मेडिकल कॉलेज' की नीति के तहत इस साल सुल्तानपुर, कुशीनगर, गोंडा और पीलीभीत जैसे जिलों में नए सरकारी कॉलेजों को मान्यता मिली है। बता दें कि प्रत्येक नए कॉलेज में न्यूनतम 100 सीटें होती हैं, इसलिए यूपी के छात्रों के लिए 85 परसेंट स्टेट कोटा के तहत सीटों की उपलब्धता में भारी वृद्धि हुई है। पिछले साल के मुकाबले इस साल यूपी के छात्रों को अपने ही गृह राज्य में दाखिला मिलने की संभावना 15-20 परसेंट बढ़ गई है। इसके साथ ही डीजीएमई यूपी के माध्यम से होने वाली काउंसलिंग में अब अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।
कट-ऑफ स्कोर में संभावित गिरावट
बीते साल उत्तर प्रदेश में सरकारी कॉलेजों के लिए प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन थी। जनरल और ओबीसी श्रेणी के लिए कट-ऑफ अक्सर 610-615 अंकों से ऊपर रहा था। इस साल 15,000 सीटों के इजाफे (जिसमें यूपी का बड़ा हिस्सा शामिल है) से कट-ऑफ रैंक में गिरावट आने की प्रबल संभावना है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे मध्यम रैंक वाले छात्र (जो अक्सर 5-10 अंकों से चूक जाते थे) अब सुरक्षित जोन में आ जाएंगे।
अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) का लाभ
गौर करें तो 15,000 सीटों की कुल वृद्धि में से 15 परसेंट सीटें (लगभग 2,250 सीटें) ऑल इंडिया कोटा के माध्यम से भरी जाएंगी। यूपी के स्टूडेंट्स, जो अपनी उच्च मेधा के लिए जाने जाते हैं, अब दिल्ली, राजस्थान या दक्षिण भारत के शीर्ष मेडिकल कॉलेजों में इन बढ़ी हुई सीटों के जरिए प्रवेश पा सकेंगे। इससे राज्य के भीतर की सघन प्रतिस्पर्धा का दबाव भी कम होगा।
आर्थिक राहत और विदेश पलायन पर रोक
सीटों की कमी के कारण यूपी के हजारों छात्र हर साल यूक्रेन, रूस या कज़ाकिस्तान जैसे देशों का रुख करते थे। घरेलू सीटों में वृद्धि से अब छात्र कम खर्च पर भारत के भीतर ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। निजी कॉलेजों में भी 'सेमी-गवर्नमेंट' सीटों की संख्या बढ़ने से मध्यम वर्गीय परिवारों पर वित्तीय बोझ कम होगा।
हालांकि सीटों का बढ़ना एक बड़ी जीत है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों के लिए चुनौती अब शिक्षण की गुणवत्ता की है। नए कॉलेजों में इंफ्रास्ट्रक्चर तो तैयार है, लेकिन अनुभवी शिक्षकों की कमी को पूरा करना सरकार के लिए प्राथमिकता होनी चाहिए।
पिछले साल के मुकाबले इस साल यूपी के छात्र-छात्राएं अधिक 'मानसिक शांति' के साथ नीट परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। यह 15,000 सीटें केवल संख्या मात्र नहीं हैं, बल्कि उन हजारों मेधावी युवाओं के लिए डॉक्टर बनने के द्वार हैं, जो अब तक संसाधनों और सीटों की कमी के कारण पीछे रह जाते थे। उत्तर प्रदेश अब देश के 'मेडिकल मैनपावर' का सबसे बड़ा स्रोत बनने की राह पर अग्रसर है।