ग्रेटर नोएडा के कासना स्थित औद्योगिक क्षेत्र से यूपी एटीएस ने जिहादी साहित्य के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी में धार्मिक उन्माद फैलाने के मामले की तरह यहां भी भारी मात्रा में कट्टरपंथी सामग्री छापकर देश-विदेश में भेजी जा रही थी। जांच में सामने आया कि यह सामग्री नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बरेली और मुंबई जैसे शहरों में भेजी गई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि करीब 27.50 लाख किताबें अफ्रीकी देशों, खासकर तंजानिया, भेजी गईं, जिनकी फंडिंग का तार तुर्किए से जोड़कर देखा जा रहा है।
कंपनियों की आड़ में चल रहा था अवैध प्रकाशन
कासना स्थित इस्तांबुल इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और हकीकत आफसेट एंड पब्लिशर्स लिमिटेड के नाम पर यह पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। फैक्ट्री में तुर्किए और बांग्लादेश से लोगों के लगातार आने-जाने की पुष्टि ने इस शक को और मजबूत किया है कि यहां से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की कट्टरपंथी गतिविधि चलाई जा रही थी। यूपी एटीएस द्वारा पकड़ा गया फरहान नबी सिद्दीकी पिछले सात वर्षों से दो करोड़ रुपये से अधिक की जिहादी किताबें छाप चुका था। इन किताबों की बिक्री से उसे लाखों की कमाई हुई और उसने लगभग 19 लाख रुपये जीएसटी के रूप में जमा भी किया।
अवैध कारोबार का कागजी जाल उजागर
जीएसटी विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि फरहान ने 20 फरवरी 2029 को यूपीसीडा के औद्योगिक क्षेत्र में 'इस्तांबुल इंटरनेशनल' नाम से इलेक्ट्रॉनिक गुड्स की फर्म पंजीकृत कराई थी। इसी फर्म की आड़ लेकर दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित हकीकत प्रिंटिंग प्रेस की किताबों का अवैध प्रकाशन किया जा रहा था। इतना ही नहीं, फरहान ने 23 दिसंबर 2024 को उसी पते पर एक और फर्म—'रियल ग्लोबल एक्सप्रेस लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड'—की भी रजिस्ट्री कराई, जिसे एयरपोर्ट और पोस्टल सेवाओं के संचालन के लिए बनाया गया था। हालांकि इस फर्म से कोई उत्पाद नहीं बेचा गया, लेकिन शक्तिवर्धक दवाइयों की लाखों रुपये की खरीदारी जरूर की गई।
एटीएस की कार्रवाई और आगे की जांच
शनिवार को लखनऊ से पहुंची यूपी एटीएस की टीम ने फरहान को गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि वह न केवल जिहादी साहित्य का अवैध प्रकाशन कर रहा था, बल्कि इसे देश-विदेश में फैलाने के लिए पूरे नेटवर्क को सक्रिय रूप से संचालित कर रहा था। यह भी शक है कि दिल्ली के लाल किले के पास हुए हालिया धमाके के तार अल फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों के साथ-साथ इसी नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच में जुटी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं यह गिरोह किसी बड़ी आतंकी साजिश की तैयारी तो नहीं कर रहा था।