नोएडा। ग्रेटर नोएडा के बोड़ाकी मेंप्रस्तावित मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब(MMTH) अब आनंद विहार रेलवे टर्मिनल का प्रमुख विकल्प बनने जा रहा है। हाल ही में सात गांवों के किसानों ने जमीन देने को सहमति दे दी है, जिससे जमीन अधिग्रहण की अड़चन दूर हो गई है और परियोजना को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है। यह स्टेशन दिल्ली के आनंद विहार पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करेगा और पूर्वी भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए नया गेटवे बनेगा।
सात गांवों के किसानों ने दी जमीन देने की सहमति
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बोड़ाकी रेलवे टर्मिनल के विस्तार के लिए कुल 137 एकड़ अतिरिक्त जमीन की जरूरत है। इस जमीन में सात गांव शामिल हैं — बोड़ाकी, चमरावली, दादरी, तिलपता, करनवास, पाली, पल्ला और चमरावली रामगढ़। इन गांवों में करीब 1500 से 1800 परिवार रहते हैं।वार्ता के बाद किसानों ने अपनी जमीन देने की पूरी सहमति दे दी है। अब पुनर्वास की प्रक्रिया तेज होने और सर्वे कार्य पूरा होने की उम्मीद है। प्रभावित परिवारों को शिव नाडर विश्वविद्यालय के पास या गांव के नजदीक ही बसाने की योजना बनाई जा रही है।
दिल्ली की भीड़ को करेगा नियंत्रित
दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल की ओर जाने वाली ट्रेनों का भारी बोझ है।बोड़ाकी स्टेशन का विस्तार कर इसे ग्रेटर नोएडा टर्मिनल के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां से करीब 70 ट्रेनों का संचालन होगा, जिससे आनंद विहार, नई दिल्ली और गाजियाबाद स्टेशनों पर यात्री भार काफी हद तक कम हो जाएगा।
विश्व स्तरीय सुविधाएं और कनेक्टिविटी
13 प्लेटफॉर्म वाला आधुनिक रेलवे स्टेशन (कुल क्षेत्रफल लगभग 137-267 एकड़)।
मल्टीमॉडल हब में इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT) और लोकल बस टर्मिनल भी शामिल होंगे।
एक्वा लाइन मेट्रो से सीधा जुड़ाव — नोएडा मेट्रो डिपो स्टेशन से बोड़ाकी तक नई मेट्रो लाइन बिछाई जाएगी।
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) और NH-34 से उत्कृष्ट सड़क कनेक्टिविटी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) से करीब 30-45 मिनट की दूरी।
यह हब दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के तहत विकसित हो रहा है और इसे 'स्पेशल रेलवे प्रोजेक्ट' का दर्जा मिला है।
विकास की नई संभावनाएं
बोड़ाकी का यह मल्टीमॉडल हब न केवल यातायात सुविधा बढ़ाएगा, बल्कि आसपास के क्षेत्र में रियल एस्टेट, कॉमर्शियल और औद्योगिक विकास को भी गति देगा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और रेल मंत्रालय की यह संयुक्त परियोजना NCR को पूर्वी भारत से बेहतर जोड़ेगी।किसानों की सहमति के बाद अब सर्वे कार्य पूरा होने और पुनर्वास की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने पर यह स्टेशन 2-3 वर्ष में यात्री सेवा शुरू कर सकता है।
घटना की जानकारी मिलते ही गांव रजापुर में चर्चा का माहौल है। ग्रामीण इस बात से हैरान हैं कि जिस युवक को वे सामान्य मजदूर के रूप में जानते थे, उसका नाम इस तरह के गंभीर मामले में सामने आया है।