देश में शादी से पहले दूल्हों के डोप टेस्ट और मेडिकल जांच को अनिवार्य करने की मांग ने एक नई बहस छेड़ दी है। लोकसभा में उठे इस मुद्दे ने समाज के उस पहलू को सामने ला दिया है, जहां अक्सर शादी से पहले सिर्फ दुल्हन की जांच-पड़ताल होती है। बढ़ते तलाक, घरेलू हिंसा और नशे की समस्या को देखते हुए इस प्रस्ताव को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
लोकसभा में क्यों उठी ये मांग?
लोकसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद Malvinder Singh Kang ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि शादी जैसे महत्वपूर्ण रिश्ते में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में कई लोग शादी से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति, नशे की आदत या अन्य गंभीर जानकारी छिपा लेते हैं, जिससे बाद में रिश्ते टूटने की नौबत आ जाती है।
महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा मामला
सांसद ने इस मांग को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि कई मामलों में शादी के बाद दूल्हे की नशे की लत या गंभीर बीमारी सामने आती है। इससे न केवल घरेलू हिंसा के मामले बढ़ते हैं बल्कि महिलाओं का जीवन भी प्रभावित होता है। ऐसे में पहले से मेडिकल जांच होने से कई समस्याओं को रोका जा सकता है।
दोहरा मापदंड खत्म करने की बात
इस मुद्दे पर यह भी कहा गया कि समाज में एक तरह का दोहरा रवैया देखने को मिलता है। जहां दुल्हन की शिक्षा, चरित्र और पारिवारिक पृष्ठभूमि की गहन जांच होती है, वहीं दूल्हे के मामले में इतनी सख्ती नहीं बरती जाती। इस असंतुलन को खत्म करने के लिए डोप टेस्ट और मेडिकल सर्टिफिकेट को अनिवार्य बनाने की मांग सामने आई है।
कानून बनाने की उठी मांग
सांसद ने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की है कि शादी का रजिस्ट्रेशन करने से पहले दूल्हे के लिए डोप टेस्ट और मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जाए। उनका मानना है कि यह कदम न सिर्फ महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा बल्कि विवाह संस्था को भी मजबूत बनाएगा।
क्या लागू हो सकता है ऐसा नियम?
हालांकि यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है, लेकिन अगर इस पर सहमति बनती है तो भविष्य में शादी के नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कानून को लागू करने के लिए कानूनी, सामाजिक और नैतिक पहलुओं पर गहन चर्चा जरूरी होगी।