
मोदीपुरम। सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 18वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बढ़ती जनसंख्या खाद्यान्न उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती है। इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों और नवडिग्रीधारी युवाओं को शोध व नवाचार की दिशा में कार्य करना होगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि आज देश की आबादी 142 करोड़ हो चुकी है। ऐसे में उत्पादन बढ़ाना समय की मांग है। किसानों को उन्नत बीज, नई तकनीक और रसायन मुक्त खेती के लिए जागरूक करना आवश्यक है। नकली बीजों पर रोक लगाने और उन्नत बीज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी वैज्ञानिकों व कृषि संस्थानों की है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों और गांवों के विकास के लिए कई लक्ष्य तय किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। बीते वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन 700 से 687 मैट्रिक टन तक पहुँचा है। तिलहन व दलहन उत्पादन में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज तिलहन का 1 लाख करोड़ का आयात और तिलहन का 40 करोड़ का निर्यात हो रहा है, जिसे और बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कृषि मंत्री ने बताया कि तकनीक का लाभ किसानों तक पहुँच रहा है। प्रदेश में दस हजार से अधिक कृषि उत्पादक तकनीकी योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। योगी सरकार के कार्यकाल में विश्वविद्यालय में वेटरनरी, फूड टेक्नोलॉजी, शुगरकेन और हॉर्टिकल्चर की नई कक्षाएं शुरू हुई हैं। विश्वविद्यालय ने अपनी 25 वर्ष की यात्रा में कई उपलब्धियां हासिल कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।
शाही ने छात्रों से कहा कि डिग्री केवल प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। अपने ज्ञान और अनुभव से वे ‘विकसित भारत-विकसित कृषि’ के संकल्प को साकार करने में योगदान दें। मेहनत, लगन और शोध से ही किसान और कृषि क्षेत्र को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया जा सकता है।