Women in Every Election: भारत के लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और बीते कुछ वर्षों में वे चुनावों की सबसे निर्णायक शक्ति बनकर उभरी हैं। चाहे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा हो या झारखंड—जहाँ भी महिलाओं ने जिस दल पर भरोसा जताया, वहाँ उसी पार्टी की सरकार बनी। यही तस्वीर अब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में भी देखने को मिली, जहाँ महिलाओं की रिकॉर्ड वोटिंग ने पूरे चुनावी समीकरण बदल दिए। महिलाओं ने न केवल वोटिंग प्रतिशत बढ़ाया, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि उनकी पसंद ही सत्ता की दिशा तय करती है।
महिलाओं की वोटिंग बनी चुनावी गेमचेंजर
मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और हरियाणा में पहले हुए चुनावों ने इस ट्रेंड को बेहद स्पष्ट कर दिया था। मध्यप्रदेश में 2023 के चुनावों में 76% महिलाओं ने मतदान करके भाजपा को ऐतिहासिक बहुमत दिलाया। वहीं महाराष्ट्र में 2024 में महिला टर्नआउट 65% के पार गया, जिसने सत्ता में एकनाथ शिंदे सरकार की वापसी सुनिश्चित कर दी। विशेषज्ञों के अनुसार, महिलाओं ने जाति-धर्म से ऊपर उठकर सीधे उन योजनाओं को वोट दिया जो उनके जीवन को प्रभावित कर रही थीं—जैसे लाड़ली बहना योजना, माझी लाडकी बहिण योजना या मैया योजना। इस ‘महिला वेव’ ने इन राज्यों में सत्ता का रास्ता तय कर दिया।
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महिला शक्ति ने बदला चुनाव
बिहार में इस बार महिलाओं की ताकत और भी अधिक दिखी। यहाँ 71.6% महिला वोटिंग हुई, जो पुरुष मतदाताओं से लगभग 9% अधिक थी। यही वजह रही कि एनडीए को 200 से ज्यादा सीटों पर बढ़त मिली और महागठबंधन बुरी तरह पिछड़ गया। बिहार में महिलाओं को मिले आर्थिक लाभ, शराबबंदी और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों ने उन्हें एनडीए के पक्ष में मजबूती से लामबंद किया। लगभग 5 लाख अधिक महिलाओं ने इस चुनाव में मतदान किया, जिससे यह साफ हो गया कि बिहार का चुनाव आखिरकार महिला वोटरों ने ही तय किया।