गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) एक जुलाई को अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह देश की आजादी के बाद का अब तक का सबसे बड़ा टैक्स सुधार है। इसे व्यवसायों के बीच एक सरल और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम के तौर पर लगभग हर जगह स्वीकार किया जा चुका है। यह जानकारी ताजा डेलॉइट सर्वे में दी गई।
जीएसटी 2.0 में डिजिटलाइजेशन
रिपोर्ट के अनुसार, अगले चरण यानी जीएसटी 2.0 में डिजिटलाइजेशन से आगे बढ़कर एक इंटेलिजेंट, प्रेडिक्टिव और इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क अपनाया जाएगा। इसमें बिजनेस एआई-आधारित अनुपालन, डेटा के जरिए विवादों में कमी और करदाताओं के लिए एक सहज और एकीकृत अनुभव की उम्मीद है।
जीएसटी के साथ अपने अनुभव
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कॉरपोरेट जगत का जीएसटी पर विश्वास बढ़ रहा है। 99 प्रतिशत से अधिक कारोबारियों ने जीएसटी के साथ अपने अनुभव को सकारात्मक या तटस्थ बताया है। वहीं, नकारात्मक धारणा लगभग शून्य पर पहुंच गई है, जो 2025 में 5 प्रतिशत और 2022 में 10 प्रतिशत थी।
जगत का विश्वास मजबूत किया
इस बढ़ते भरोसे के पीछे कई महत्वपूर्ण सुधार हैं, जिनमें कर अनुपालन का डिजिटलीकरण (69 प्रतिशत), कर प्रक्रियाओं का स्वचालन(54 प्रतिशत), ई-इनवॉइसिंग एवं ई-वे बिल प्रणाली का स्थिर होना (48 प्रतिशत) प्रमुख हैं। इसके अलावा, पारदर्शिता, एकरूपता और कारोबार करने में बढ़ी आसानी ने भी जीएसटी व्यवस्था पर उद्योग जगत का विश्वास मजबूत किया है।
2026 में 67 प्रतिशत हो गई
रिपोर्ट के अनुसार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तेजी से तिमाही जीएसटी रिटर्न व्यवस्था को अपना रहे हैं। इसका प्रमाण यह है कि इस व्यवस्था के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया 2023 में 12 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 67 प्रतिशत हो गई है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रौद्योगिकी-आधारित कर प्रशासन अब बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। कंपनियां अधिक सटीकता, तेजी और प्रक्रियाओं में पूर्वानुमान सुनिश्चित करने के लिए लगातार डिजिटल प्रणालियों पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं।
खपत में कोई बदलाव नहीं देखा गया
रिपोर्ट में कहा गया है कि जीएसटी दरों के युक्तिकरणका सबसे अधिक प्रभाव उपभोक्ता क्षेत्र (64 प्रतिशत), लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर क्षेत्र (58 प्रतिशत) में देखा गया है। हालांकि, यह प्रभाव मुख्य रूप से संरचनात्मक है और बहुत कम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां खपत में कोई बदलाव नहीं देखा गया। कुल मिलाकर, विभिन्न क्षेत्रों की अपनी-अपनी विशेषताओं के बावजूद, सभी की अपेक्षा एक अधिक सरल, स्मार्ट और इंटेलिजेंट जीएसटी प्रणाली की है।