देशभर के कारोबारियों के लिए राहत की खबर है। जीएसटी नेटवर्क (GSTN) ने ई-वे बिल सिस्टम में 1 अगस्त 2026 से लागू होने वाले दो अहम बदलाव फिलहाल टाल दिए हैं। GSTN ने बताया कि 9 जून और 17 जून 2026 को जारी एडवाइजरी में जिन नए नियमों की जानकारी दी गई थी, उन्हें अगले आदेश तक लागू नहीं किया जाएगा। फिलहाल इन बदलावों की नई तारीख घोषित नहीं की गई है, इसलिए मौजूदा ई-वे बिल व्यवस्था पहले की तरह जारी रहेगी।
किन दो बदलावों पर लगी रोक?
पहला प्रस्तावित बदलाव 'बिल टू-शिप टू' ट्रांजैक्शन से जुड़ा था। इसके तहत 'शिप टू GSTIN' भरना अनिवार्य किया जाना था, ताकि सामान के वास्तविक प्राप्तकर्ता की पहचान और ट्रेसबिलिटी बेहतर हो सके। दूसरा बदलाव वॉलंटरी क्लोजर फैसिलिटी से जुड़ा था, जिसके तहत अगर किसी कारण से माल की आवाजाही नहीं होती, तो टैक्सपेयर स्वयं सक्रिय ई-वे बिल बंद कर सकते थे। इसके अलावा ERP और ई-इनवॉइस इंटीग्रेशन के लिए API में भी बदलाव प्रस्तावित थे।
इंडस्ट्री ने क्यों जताई थी चिंता?
इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई कंपनियों को इन नए नियमों के तकनीकी परीक्षण के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खासकर ऑटो कंपोनेंट, ईपीसी और ई-कॉमर्स जैसे सेक्टरों में सप्लाई चेन जटिल होने के कारण नए सिस्टम को लागू करना आसान नहीं था। टैक्स विशेषज्ञों का मानना है कि GSTN ने सिर्फ तारीख आगे नहीं बढ़ाई, बल्कि एडवाइजरी और FAQ भी वापस ले लिए हैं। इससे संकेत मिलता है कि सरकार उद्योग जगत से मिले सुझावों के आधार पर नियमों की दोबारा समीक्षा कर रही है।
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कारोबार पर फिलहाल नहीं पड़ेगा कोई असर
विशेषज्ञों के अनुसार, नए नियमों को टालने से व्यापारिक गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। मौजूदा ई-वे बिल सिस्टम पहले की तरह चलता रहेगा। उद्योग जगत, ERP वेंडर्स, GST सुविधा प्रदाताओं और अन्य हितधारकों ने सिस्टम अपडेट, API इंटीग्रेशन और टेस्टिंग के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। अब सरकार नया रोडमैप तैयार करने के बाद ही नई तारीख का ऐलान करेगी।
क्या है E-Way Bill और कब होता है जरूरी?
जीएसटी नियमों के तहत 50,000 रुपये या उससे अधिक मूल्य का सामान एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने पर ई-वे बिल बनाना अनिवार्य होता है। इसे सामान भेजने से पहले जीएसटी पोर्टल पर पंजीकृत व्यापारी या ट्रांसपोर्टर तैयार करता है। जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की सीमाओं पर फिजिकल चेक पोस्ट हटाए गए थे और ई-वे बिल सिस्टम को डिजिटल ट्रैकिंग के लिए लागू किया गया, जिससे माल की आवाजाही तेज हुई और टैक्स निगरानी भी आसान बनी।