मध्यप्रदेश के गुना जिले में खाद वितरण केंद्र पर इंतजार करती एक आदिवासी महिला की मौत ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो दिनों से खाद के लिए कतार में खड़ी रही महिला की तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। लगातार ठंड, थकान और स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद केंद्र पर भीड़ को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम न होना अब जांच का विषय बन गया है।
दो दिनों से खाद के लिए लगी थी लाइन
कुशेपुर गांव की रहने वाली भुरिया बाई बुधवार रात खाद वितरण केंद्र पर अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं। परिजनों के अनुसार, वह लगातार दो दिन से लाइन में खड़ी थीं और रात में भी वहीं रुकीं। भीड़ अधिक होने और इंतजार लंबा खिंचने से उनकी हालत पर असर पड़ा।
अचानक बिगड़ी तबीयत, रास्ते में तोड़ा दम
गवाहों के मुताबिक, महिला को देर शाम तेज उल्टियां शुरू हुईं। परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक जानकारी के अनुसार, उन्हें डायबिटीज थी और ठंड में लंबा इंतजार उनकी सेहत पर भारी पड़ा।
मौत के बाद प्रशासन हरकत में आया
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन के अधिकारी देर रात खाद केंद्र पहुंचे। भीड़ प्रबंधन और व्यवस्था की समीक्षा की गई। परिवार से बातचीत के दौरान अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि लापरवाही की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जनप्रतिनिधियों ने जताया दुख, दी गई आर्थिक सहायता
घटना सामने आने के बाद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। परिवार को तत्काल 2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई, साथ ही अंतिम संस्कार के लिए भी सहायता दी गई है।
मौत पर उठे सवाल, व्यवस्था सुधार की मांग
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हर साल खाद वितरण केंद्रों पर अव्यवस्था रहती है, जिससे किसान और महिलाओं को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। इस घटना के बाद लोगों ने मांग की है कि वितरण प्रणाली में सुधार किया जाए ताकि ऐसी स्थितियां दोबारा न बने।