बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना को सुनाई गई मौत की सजा का संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने विरोध किया है। उनके प्रवक्ता स्टेफन दुजारिक ने जानकारी दी कि संयुक्त राष्ट्र हर हालत में मौत की सजा के खिलाफ खड़ा होता है।
फैसला उनकी गैरहाजिरी में सुनाया गया
दुजारिक ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग में एक सवाल के जवाब में ये बातें कहीं। आापको बता दें कि शेख हसीना इस समय भारत में निर्वासन की जिंदगी जी रही हैं। उनके खिलाफ यह फैसला उनकी गैरहाजिरी में सुनाया गया।
पीड़ितों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण
दुजारिक ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क के एक बयान का हवाला दिया और कहा कि हम मृत्युदंड के उनके विरोध से पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फैसला बीते वर्ष बांग्लादेश में प्रदर्शनों को दबाने के दौरान हुए गंभीर अत्याचारों के पीड़ितों को लेकर एक महत्वपूर्ण क्षण बताया गया है।
ये भी पढ़ें: व्हाइट हाउस में ट्रंप ने खारिज की खुफिया रिपोर्ट, बोले-खशोगी की हत्या से अनजान थे MBS
“अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण” नाम दिया
शेख हसीना को मौत की सजा एक स्थानीय कोर्ट ने दी। उसने स्वयं को “अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण” नाम दिया है। यह कोर्ट सिर्फ बांग्लादेशी न्यायाधीशों से बनी है। उसने उन्हें “मानवता के खिलाफ अपराध” का दोषी माना है। यह न्यायाधिकरण मूल रूप से बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानियों और उनके स्थानीय सहयोगियों पर केस चलाने को लेकर बनाया गया था।
समर्थकों ने फिर से सक्रिय किया
बाद में इस कोर्ट को देश पर काबू रखने वाले गैर-निर्वाचित नेता मुहम्मद यूनुस और उनके समर्थकों ने फिर से सक्रियता दिखाई। इस तरह से शेख हसीना और अन्य नेताओं पर पिछले वर्ष छात्र प्रदर्शनों को दबाने के आरोपों में केस दर्ज किया गया, ताकि मुकदमा चलाया जा सके। प्रदर्शनों के उग्र होने के बाद शेख हसीना को देश छोड़कर भारत की शरण लेनी पड़ी थी।