मध्यप्रदेश में अब उत्तर प्रदेश के यमुना एक्सप्रेसवे की तर्ज पर ग्रीन फील्ड हाईवे बनने जा रहा है, जो ग्वालियर से आगरा तक की दूरी को बेहद आसान बना देगा। 88 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर मात्र डेढ़ घंटा रह जाएगा। यह हाईवे तीन राज्यों – मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और राजस्थान – से होकर गुजरेगा। इसके तहत चंबल नदी पर 600 मीटर लंबा हैंगिंग पुल भी बनाया जाएगा, जो तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि होगी। नवंबर 2025 से इसका निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। परियोजना के लिए ज़मीन अधिग्रहण की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ सड़क संपर्क मजबूत होगा, बल्कि रियल एस्टेट, टूरिज्म और व्यापार क्षेत्र में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिलेगा। हाईवे के साथ एनएच-44 की मरम्मत भी की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और बढ़ावा मिलेगा।
नवंबर 2025 में होगा निर्माण कार्य शुरू
इस हाईवे का निर्माण कार्य नवंबर 2025 से शुरू होने की संभावना है। फिलहाल जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और हितग्राहियों को मुआवजा वितरण का कार्य जारी है। जैसे ही बरसात का मौसम खत्म होगा, निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी।
तीन राज्यों से गुजरेगा हाईवे
यह हाईवे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान—तीनों राज्यों के कुल 36 जिलों से होकर गुजरेगा। इसमें मध्यप्रदेश के चार जिले और 30 गांवों की भूमि अधिग्रहण की जा चुकी है। परियोजना का ठेका एक प्राइवेट कंपनी को ₹4,612.65 करोड़ में दिया गया है, जिसे 30 महीने में निर्माण पूरा करना होगा।
चंबल नदी पर बनेगा विशेष पुल
हाईवे में चंबल नदी पर 600 मीटर लंबा हैंगिंग ब्रिज बनाया जाएगा। इसके लिए मिट्टी के नमूने लेकर लैब में परीक्षण किया जा रहा है, ताकि पुल की गहराई और मजबूती तय की जा सके।
कनेक्टिविटी और विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस हाईवे के बनने से आईटी, लॉजिस्टिक, टूरिज्म, ई-कॉमर्स और रियल एस्टेट सेक्टर को नई रफ्तार मिलेगी। ग्वालियर से धौलपुर होते हुए आगरा तक का NH44 भी मरम्मत के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे समग्र क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार होगा।