मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने के लिए ग्वालियर में 29 और 30 अगस्त को रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निवेशकों और उद्योगपतियों से वन-टू-वन संवाद करेंगे। कॉन्क्लेव का उद्देश्य ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में पर्यटन निवेश को बढ़ावा देना और क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक मानचित्र पर स्थापित करना है। इस आयोजन से प्रदेश में रोजगार, निवेश और पर्यटन गतिविधियों को नया आयाम मिलने की उम्मीद है।
पर्यटन निवेश को मिलेगा नया आयाम
इस कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य पर्यटन निवेश को प्रोत्साहित करना है। होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस और ईको-टूरिज्म क्षेत्र के निवेशकों को लेटर ऑफ अवॉर्ड (LoA) दिए जाएंगे। इसके साथ ही कई एमओयू और अनुबंध भी होंगे, जिनसे स्थानीय समुदाय को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे और क्षेत्रीय पर्यटन को स्थायित्व मिलेगा।
सांस्कृतिक धरोहर और अनुभवात्मक पर्यटन पर फोकस
“टाइमलेस ग्वालियर: इकोज़ ऑफ़ कल्चर, स्पिरिट ऑफ़ लेगेसी” थीम पर आधारित यह आयोजन ग्वालियर की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, शास्त्रीय संगीत और स्थापत्य कला को दुनिया के सामने लाने का प्रयास है। पैनल डिस्कशनों में ग्वालियर को सांस्कृतिक ब्रांडिंग और हेरिटेज टूरिज्म से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा होगी।
दो महत्वपूर्ण पैनल डिस्कशन
1. Tourism as a Cultural Bridge – Branding Gwalior and Heartland of MP: इस सत्र में ग्वालियर की सांस्कृतिक पहचान और उसकी वैश्विक ब्रांडिंग पर चर्चा होगी।
2. Gwalior and Chambal Rising – Inbound Appeal through Heritage, Luxury and Experience: इसमें विरासत, लग्जरी स्टे, डेस्टिनेशन वेडिंग और अनुभवात्मक पर्यटन जैसे नए आयामों पर संवाद होगा।
पर्यटन प्रदर्शनी से स्थानीय ब्रांड्स को बढ़ावा
कॉन्क्लेव में विशेष पर्यटन प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें मध्यप्रदेश के पर्यटन स्थल, हॉस्पिटैलिटी ब्रांड्स, होम-स्टे, हैंडलूम/हैंडिक्राफ्ट, साहसिक गतिविधियाँ और सांस्कृतिक धरोहरों से जुड़े स्टॉल प्रदर्शित होंगे। इससे स्थानीय व्यवसायियों को प्रोत्साहन मिलेगा और निवेशकों को प्रदेश की क्षमता का प्रत्यक्ष अनुभव होगा।
यह आयोजन न केवल पर्यटन निवेश को बढ़ावा देगा बल्कि ग्वालियर और मध्यप्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर एक मजबूत पहचान भी दिलाएगा।