
मध्य प्रदेश में एक बार फिर बच्चों की दवा को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। छिंदवाड़ा में सिरप से हुई मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब ग्वालियर में मुरार जिला अस्पताल से दिए गए अजिथ्रोमाइसिन सिरप में कीड़े निकलने से हड़कंप मच गया। बच्चे के इलाज के लिए लाई गई इस दवा में रेंगते कीड़े देखकर महिला घबरा गई और तुरंत अस्पताल में शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल ड्रग विभाग ने सैंपल जांच के लिए भेजे हैं।
मुरार
अस्पताल में महिला की
शिकायत से मचा बवाल
ग्वालियर के मुरार अस्पताल में एक महिला दो दिन पहले अपने बच्चे को पीडियाट्रिक विभाग में दिखाने आई थी। डॉक्टर ने बच्चे को अजिथ्रोमाइसिन सिरप दिया, जो आमतौर पर सर्दी-जुकाम और बैक्टीरियल इंफेक्शन में दिया जाता है। महिला जब घर पहुंची और बच्चे को सिरप पिलाने की कोशिश की, तो उसने देखा कि बोतल में कीड़े रेंग रहे हैं। इसके बाद वह तुरंत सिरप लेकर अस्पताल पहुंची और शिकायत दर्ज कराई।
अस्पताल
प्रशासन ने वितरण पर
लगाई रोक
शिकायत मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने तत्काल सिरप के वितरण पर रोक लगा दी। बताया जा रहा है कि यह सिरप भोपाल से सप्लाई किया गया था। अस्पताल के स्टोर रूम में अजिथ्रोमाइसिन सिरप की करीब 316 बोतलें रखी थीं। फिलहाल सभी बोतलों को जांच के लिए अलग कर दिया गया है ताकि अन्य मरीजों को यह सिरप न दिया जाए।
ड्रग विभाग की जांच टीम सक्रिय
मामले की जानकारी मिलते ही ड्रग विभाग की टीम अस्पताल पहुंची और सिरप की 10 बोतलों की जांच की। हालांकि उनमें कोई कीड़े नहीं पाए गए, लेकिन सतर्कता बरतते हुए 10 बोतलों को सील कर कोलकाता लैब भेजा गया है। विभाग का कहना है कि सिरप की एक्सपायरी 2027 तक है, इसलिए खराब होना संदिग्ध है। जांच के बाद ही असल कारण स्पष्ट होगा।
अजिथ्रोमाइसिन सिरप का इस्तेमाल
यह सिरप बच्चों को बैक्टीरियल इंफेक्शन, खांसी-जुकाम और बुखार जैसी बीमारियों में दिया जाता है। लेकिन अब इस घटना के बाद लोगों में दवाओं की क्वालिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विभाग ने फिलहाल सभी अस्पतालों को बच्चों की दवाओं की सख्त जांच के निर्देश दिए हैं।