आधुनिक दौर में जहां शादियां भव्य सजावट, तेज संगीत और दिखावे का प्रतीक बनती जा रही हैं, वहीं ग्वालियर में एक ऐसा विवाह होने जा रहा है जो परंपरा, प्रकृति और भारतीय संस्कारों को केंद्र में रखकर आयोजित किया जा रहा है। 22 जून को होने वाले इस विवाह में वैदिक रीति-रिवाजों को प्राथमिकता दी गई है। खास बात यह है कि यह आयोजन दहेज मुक्त होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगा।
संस्कारों के साथ शुरू हुआ विवाह का शुभ सफर
विवाह से पहले शुभ परंपराओं के अनुसार विशेष पूजन का आयोजन किया गया। गोधूलि बेला में धार्मिक वातावरण के बीच गणेश पूजन और गुरु-गौरी गो-पूजन संपन्न हुआ। इस दौरान परिवार के लोगों ने गो माता की आरती कर आशीर्वाद लिया और नए जीवन की सुख-समृद्धि की कामना की। आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक परंपरा निभाना नहीं बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों को भी जीवंत करना बताया गया।
प्लास्टिक मुक्त आयोजन से दिया जाएगा संदेश
इस विवाह समारोह की सबसे खास बात इसका जीरो प्लास्टिक स्वरूप है। आयोजन में प्लास्टिक और डिस्पोजल सामग्री का उपयोग पूरी तरह समाप्त रखा गया है। मेहमानों के भोजन की व्यवस्था भी पारंपरिक तरीके से की गई है, जहां स्टील के बर्तनों और पत्तलों में भोजन परोसा जाएगा।
वैदिक मंत्रों के बीच होंगे सात फेरे
विवाह को पूरी तरह वैदिक परंपराओं के अनुसार संपन्न कराया जाएगा। मंत्रोच्चार और धार्मिक विधि-विधान के बीच प्रकृति को साक्षी मानकर सात फेरे लिए जाएंगे। इसमें अनावश्यक तामझाम और आधुनिक दिखावे को पूरी तरह अलग रखा गया है।
परंपरा और प्रकृति के संतुलन की अनोखी पहल
आयोजन से जुड़े लोगों का मानना है कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति और आध्यात्मिक परंपराओं का विशेष महत्व रहा है। यही वजह है कि इस विवाह को केवल एक सामाजिक आयोजन नहीं बल्कि संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
समाज को नई दिशा देने का प्रयास
आज के समय में जब विवाह समारोहों में खर्च और दिखावे की होड़ बढ़ती जा रही है, ऐसे में यह पहल समाज को एक अलग सोच देने का प्रयास करती दिखाई दे रही है। यह आयोजन बताता है कि परंपराओं से जुड़कर भी यादगार और सार्थक समारोह आयोजित किए जा सकते हैं।