ग्वालियर। शारदीय नवरात्रि 2025 का पावन पर्व इस बार 29 सितंबर से 7 अक्टूबर तक भक्तिभाव से मनाया जा रहा है। देवी दुर्गा के नौ रूपों की आराधना के इस पर्व में मध्य प्रदेश के ग्वालियर का नहर वाली माता मंदिर रहस्यमयी आस्था का बड़ा केंद्र बना हुआ है। लगभग 250 साल पुराना यह मंदिर अपनी अनूठी मान्यताओं के कारण हर वर्ष लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचता है।
क्यों कहा जाता है नहर वाली माता
ग्वालियर के चंद्रवदनी इलाके में स्थित इस मंदिर के किनारे कभी एक नहर बहती थी। इसी कारण मां दुर्गा को यहां नहर वाली माता के नाम से जाना जाता है। मंदिर में विराजमान देवी की अद्भुत प्रतिमा उत्तरमुखी शेर पर विराजित है। कहा जाता है कि यह स्वरूप उस समय का है, जब माता राक्षसों का संहार कर दक्षिण से लौट रही थीं। नवरात्रि के दौरान यहां चौला चढ़ाने और विशेष पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।
नगर कोट से आई दिव्य प्रतिमा
मान्यता है कि माता की यह प्रतिमा हिमाचल के नगर कोट से लाकर स्थापित की गई थी। स्थानीय मान्यता के अनुसार, जो महिलाएं संतान सुख की कामना करती हैं, वे माता के दरबार में नारियल अर्पित कर मन्नत मांगती हैं। माता की कृपा से उनकी सूनी गोद भर जाती है और मनोकामना पूर्ण होने पर वे यहां पालना चढ़ाने आती हैं।
व्यापार में लाभ देने वाली मैया
इस मंदिर को लोग प्रॉफिट वाली मैया भी कहते हैं। कहा जाता है कि जिन व्यापारियों का कारोबार घाटे में चल रहा होता है, वे यहां आकर दर्शन मात्र से लाभ प्राप्त करते हैं। व्यापारी मनोकामना पूरी होने पर भंडारे और विशेष पूजन करवाते हैं। यह रहस्य आज तक कोई सुलझा नहीं पाया कि आखिर माता के दरबार से ऐसा चमत्कार कैसे होता है।
रहस्यमयी आस्था का केंद्र
नवरात्रि के दौरान यह मंदिर देर रात तक रौशनी और भक्ति से जगमगाता है। भक्तों का मानना है कि माता की शक्ति इस स्थान को चमत्कारिक बना देती है, जहां हर मन्नत पूरी होती है—चाहे वह संतान की हो या व्यापार में लाभ की।