मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्टोरल असिस्टेंस (आईडीईए) के डेलिगेशन से मुलाकात की। इस मौके पर भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जोर देते हुए कुमार ने कहा कि भारत में चुनाव राजनीतिक पार्टियों, उम्मीदवारों, ऑब्जर्वर, मीडिया और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की निगरानी में होते हैं, जिससे हर स्टेज पर ऑडिट जैसी ट्रांसपेरेंसी बनी रहती है। उन्होंने कहा कि आम चुनावों के दौरान, चुनाव आयोग 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को इकट्ठा करता है, जिसमें पोलिंग स्टाफ, पुलिस, ऑब्जर्वर और पॉलिटिकल एजेंट शामिल होते हैं।
कमीशन की क्षमता पर जोर
भारत की चुनावी प्रक्रिया के विकास के बारे में बताते हुए कुमार ने संवैधानिक मूल्यों से जुड़े रहते हुए बढ़ती मुश्किलों के हिसाब से ढलने की कमीशन की क्षमता पर जोर दिया।
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0.2 मिलियन पोलिंग स्टेशन
उन्होंने कहा कि 1951-52 में 173 मिलियन वोटर्स से लेकर 2024 में 979 मिलियन तक और शुरुआती सालों में सिर्फ 0.2 मिलियन पोलिंग स्टेशनों से लेकर आज 1.05 मिलियन से ज्यादा तक, भारत की चुनावी यात्रा ने इंस्टीट्यूशनल दूरदर्शिता और बेमिसाल पैमाना दिखाया है।
743 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया
उन्होंने कहा कि 2024 के आम चुनावों में 743 राजनीतिक पार्टियों ने हिस्सा लिया। इनमें 6 राष्ट्रीय और 67 राज्य स्तरीय पार्टियां और 20 हजार से ज्यादा उम्मीदवार शामिल थे। उन्होंने आगे कहा कि इस प्रक्रिया में 6.2 मिलियन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का इस्तेमाल किया गया।