
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुधवार को बताया कि मौसम की बदलती परिस्थितियां दिल्ली-एनसीआर में इन्फ्लूएंजा ए स्ट्रेन एच3एन2 के केस को बढ़ा दिया है। एच3एन2 एक मौसमी फ्लू की तरह है. ये मनुष्यों में तेजी से फैलता है। ये समय के साथ म्यूटेट होता रहता है। बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को इस बीमारी से सबसे अधिक खतरा है। यह कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों और अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोग या मधुमेह के रोगियों में अधिक गंभीर रूप ले सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि एच3एन2 की वजह से इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़ रहे हैं। इसके प्रमुख लक्षणों में बुखार, खांसी, गले में खराश, और मांसपेशियों में दर्द शामिल हैं।
लंग फेल्योर से जूझना पड़ सकता है
विशेषज्ञ ने बताया कि यह स्थिति आमतौर पर हल्की होती है, लेकिन अन्य बीमारियों से पी़ड़ित लोगों में यह गंभीर होती है। हालांकि ज्यादातर मामले हल्के होते हैं, फिर भी पिछली कोमोरबिडिटी (एक ही समय में एक से अधिक बीमारियों का होना) वाले लोग जिन्हें गुर्दे की समस्या, मधुमेह, हृदय रोग, या फेफड़ों की बीमारियां हैं, उन्हें निमोनिया या फिर लंग फेल्योर से जूझना पड़ सकता है।
11,000 से ज्यादा घरों पर किए गए सर्वेक्षण
सोशल कम्युनिटी प्लेटफॉर्म लोकलसर्किल्स की ओर से 11,000 से ज्यादा घरों पर किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 69 प्रतिशत घरों में कम से कम एक सदस्य में बुखार, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दी है। इसकी वजह मौसम में बदलाव और टीकाकरण की कमी बताया गया है। इसके लक्षण मौसमी फ्लू जैसे ही होते हैं। खांसी, जुकाम और नाक बहने के अलावा ये फेफड़ों पर असर होता है। आगे चलकर निमोनिया भी हो सकता है।
बच्चों में, इसके लक्षणों में मतली, उल्टी या दस्त शामिल हैं। कई रोगियों ने 5-7 दिनों तक बुखार रहने और अन्य लक्षण कम होने के बाद खांसी बने रहने की जानकारी दी। H3N2 से बचाव को लेकर सही तरह से हाथ धोना, मास्क पहनने और टीकाकरण की सलाह दी गई है। सालाना टीकाकरण करने और पीड़ितों के संपर्क से बचना इसका एकमात्र विकल्प है।