गुवाहाटी। असम का हाजो कस्बा गणेश भक्तों के लिए एक विशेष तीर्थस्थल माना जाता है। यहां स्थित गजमुख गणेश मंदिर न केवल धार्मिक धरोहर है, बल्कि गणेश उत्सव के दौरान आस्था और अद्भुत अनुभवों का अनोखा संगम भी प्रस्तुत करता है। 18वीं सदी में निर्मित यह मंदिर अपनी चमत्कारिक प्रतिमा और ऐतिहासिक मान्यता के कारण पूरे पूर्वोत्तर भारत में श्रद्धालुओं का केंद्र बना हुआ है।
गजमुख गणेश की अद्भुत प्रतिमा
कामरूप जिले में स्थित इस मंदिर में हाथी जैसी आकृति वाली गणेश प्रतिमा स्थापित है, जिसे गजमुख गणेश कहा जाता है। भक्तों का मानना है कि इस प्रतिमा के दर्शन मात्र से जीवन की सभी विघ्न बाधाएँ दूर हो जाती हैं। विशेष रूप से विवाह में आने वाली रुकावटें और संतान की कामना पूरी करने के लिए यहां पूजा अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रहती है।
गणेश उत्सव पर विशेष आयोजन
गणेश उत्सव के समय यह मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र बन जाता है। भक्तजन यहां विशेष अनुष्ठानों, भव्य आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। इस दौरान दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु यहां अपनी आस्था व्यक्त करते हैं और मंदिर परिसर में भक्तिरस का अद्भुत माहौल बन जाता है।
कपिल ऋषि की तपस्या और चमत्कार
स्थानीय मान्यता के अनुसार, ऋषि कपिल ने यहां वर्षों तक कठोर तप किया था। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर गणेश जी ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए। तभी से यह स्थल 8सिद्धपीठ के रूप में पूजनीय माना जाने लगा। श्रद्धालु मानते हैं कि गणेश उत्सव के दौरान यहां पूजा करने से विशेष पुण्य और आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।
पहुंचने का मार्ग
हाजो का गणेश मंदिर गुवाहाटी से सड़क मार्ग द्वारा मात्र एक घंटे की दूरी पर स्थित है। गुवाहाटी निकटतम रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा है, जहां से टैक्सी और बस सेवाएं उपलब्ध रहती हैं। इस कारण भक्त आसानी से यहां पहुंचकर गजमुख गणेश के दर्शन कर सकते हैं।