मध्य प्रदेश के दमोह जिले में आस्था और न्याय का अनोखा संगम देखने को मिला, जब एक मंदिर में भगवान हनुमानजी को साक्षी मानकर दो भाइयों ने वर्षों पुराना पारिवारिक विवाद सुलझा लिया। चौकी प्रभारी की पहल पर दोनों भाई पुलिस चौकी में ही स्थित मंदिर में पहुंचे और तय किया कि जो भी निर्णय भगवान हनुमानजी के सामने लिया जाएगा, उसे वे अंतिम मानेंगे। बिना किसी कानूनी लड़ाई और बिना किसी कोर्ट-कचहरी के यह मामला श्रद्धा और समझदारी से समाप्त हो गया। इस दौरान पुलिस गवाह बनी और हनुमानजी बन गए दोनों पक्षों के 'जज'। यह मामला सामाजिक समरसता और लोक आस्था का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला दमोह जिले के भूरी बिजौरी गांव का है, जहां गणेश साहू ने संतान नहीं होने के कारण 2022 में अपने छोटे भाई रामप्रसाद के बेटे खुमान को गोद लिया था। खुमान 2017 से भुसावल में गणेश के साथ रहकर मजदूरी कर रहा था। लेकिन 2024 में खुमान की शादी के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ गया। खुमान ने नाता तोड़ते हुए गणेश से गहने और बाइक लेकर दूरी बना ली। इस विवाद के बाद मामला पुलिस चौकी तक पहुंचा।
हनुमान मंदिर में हुआ समझौता
चौकी प्रभारी आनंद कुमार की पहल पर दोनों पक्षों ने कहा कि वे आपसी समझौते से विवाद खत्म करना चाहते हैं। तय हुआ कि चौकी परिसर में स्थित बजरंगबली मंदिर में भगवान को साक्षी मानकर निर्णय लिया जाएगा। दोनों भाइयों ने भगवान हनुमानजी के समक्ष शपथ लेकर समझौता किया और विवाद को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया।
पुलिस बनी गवाह, समाज को मिला संदेश
पुलिस न केवल मूकदर्शक बनी, बल्कि इस समझौते की साक्षी भी रही। यह घटना समाज को यह संदेश देती है कि आपसी विवाद को कानून के झंझट में डालने के बजाय, पारिवारिक समझ और धार्मिक विश्वास से सुलझाया जा सकता है।