लखनऊ। अखिल भारतीय संत समिति ने मां श्रृंगार गौरी का विधि-विधान से पूजन किया। यह परंपरा कई सौ साल पुरानी है। इसका निर्वहन संत समिति के लोगों ने करते हुए माता श्रृंगार गौरी के विग्रह के बाहर परिसर में पूजा-पाठ संपन्न करवाया। इस दौरान अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने इस अनुष्ठान को पूर्ण किया।
विशेष अनुष्ठान से पहले पश्चिमी दीवार पर मौजूद मां श्रृंगार गौरी के विग्रह का पूजन और नंदी महाराज का पूजन संपन्न करवाया गया।बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक भी संपन्न हुआ। माता श्रृंगार गौरी के प्राचीन पत्थरों पर कुमकुम, सिंदूर और चंदन लगाकर कपूर से मां की आरती उतारी गई।
संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि मां श्रृंगार गौरी का दर्शन पूजन का यह काम वर्षों पुराना है। यह परंपरा बहुत पुराने वक्त से चली आ रही है। ज्ञानवापी परिसर में राम कथा का आयोजन माघ के महीने में होता है।
उन्होंने बताया कि जब ज्ञानवापी को औरंगजेब द्वारा तोड़ा जा रहा था, तब काशी के संत और कथा व्यास ने भगवान विश्वनाथ को राम कथा सुनाकर मंदिर के विध्वंस के कलंक को मिटाने की बात कही थी। इसी क्रम में सैकड़ों वर्षों से अनुष्ठान होता आ रहा है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, यह 67 वर्षों से हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष भी यह कथा संचालित हो रही है। इसमें सबसे पहले मां श्रृंगार गौरी की पूजा और इसके बाद प्रतिष्ठा रत्नदी का पूजन और फिर बाबा विश्वनाथ का पूजन करके राम कथा की औपचारिक शुरुआत की गई।
क्या है श्रृंगार गौरी प्रकरण
ज्ञानवापी के पश्चिमी हिस्से में दीवार पर सिंदूर लगा हुआ स्थान श्रृंगार गौरी के मंदिर के रूप में पूजा जाता है। यह विवादित स्थल है, जिस पर हिंदू पक्ष और अंजुमन इंतजामियां की तरफ से कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। यह मुकदमा वाराणसी की कुछ महिलाओं ने दाखिल किया था।
यह महिलाएं यहां नियमित दर्शन की मांग कर रही थी, क्योंकि यहां पर दर्शन प्रतिदिन नहीं होता है। नवरात्र के दौरान एक दिन ही यहां दर्शन का नियम है। नियमित दर्शन को लेकर श्रृंगार गौरी प्रकरण काफी चर्चा में भी रहा है। यहां अभी सिर्फ विशेष पर्व पर दर्शन पूजन के लिए कुछ ही लोगों को अनुमति दी जाती है।
श्रृंगार गौरी मामले के सुनवाई के बीच ही ज्ञानवापी में कमीशन कार्रवाई की गई थी। इसमें कई साक्ष्य निकलकर सामने आए थे। इसके बाद यहां पर पुरातात्विक सर्वेक्षण भी हो चुका है।
इसका दूसरा हिस्सा भी करने की मांग की गई है। इसमें कई तहखाने और वजूखाने में एक शिवलिंग नुमा आकृति भी मिली थी, जिसको सील करने के बाद उसकी सुनवाई अलग से चल रही है।