Haridwar Har Ki Pauri: हरिद्वार में गंगा स्नान करने की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए एक जरूरी खबर है। अगर आप आने वाले दिनों में हर की पौड़ी पर आस्था की डुबकी लगाने का विचार कर रहे हैं, तो यात्रा से पहले यह जानकारी जरूर जान लें। फिलहाल हर की पौड़ी पर गंगा की धारा रोक दी गई है। बताया जा रहा है कि यहां 7 नवंबर 2026 तक पानी की आपूर्ति बंद रहेगी। ऐसे में इस अवधि में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को हर की पौड़ी पर पहले की तरह गंगा स्नान करने में परेशानी हो सकती है। इसके पीछे घाट की सफाई, मरम्मत और आगामी कुंभ मेले की तैयारियों को वजह बताया जा रहा है। आइए जानते हैं कि गंगा की धारा कब तक बंद रहेगी और इसे रोकने के पीछे क्या कारण हैं।
हर की पौड़ी पर गंगा का पानी क्यों रोका गया?
हरिद्वार के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हर की पौड़ी पर समय-समय पर सफाई और जरूरी रखरखाव के लिए गंगा की धारा रोकी जाती है। इस बार भी घाट पर पानी का प्रवाह बंद किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 20 अक्टूबर से 7 नवंबर 2026 तक यहां गंगा का पानी रोके जाने की बात कही गई है। इस दौरान घाट से जुड़े जरूरी काम पूरे किए जाने हैं। ऐसे में जो लोग गंगा स्नान के लिए हरिद्वार जाने वाले हैं, उन्हें अपनी यात्रा की योजना बनाने से पहले ताजा स्थिति की जानकारी ले लेनी चाहिए। पानी दोबारा छोड़े जाने के बाद ही हर की पौड़ी पर सामान्य रूप से स्नान की सुविधा बहाल हो सकेगी।
2027 के कुंभ मेले को लेकर भी चल रही तैयारी
हर की पौड़ी पर गंगा की धारा रोकने की एक वजह आने वाले कुंभ मेले की तैयारियों को भी बताया जा रहा है। साल 2027 में हरिद्वार में कुंभ मेला आयोजित होना है। इसे देखते हुए घाट और आसपास के क्षेत्रों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है। साफ-सफाई और मरम्मत जैसे काम इसी तैयारी का हिस्सा हो सकते हैं। जानकारी के अनुसार, 7 नवंबर को हर की पौड़ी पर गंगा का पानी फिर से छोड़े जाने की योजना है। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए स्नान की व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रा पर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन या संबंधित विभाग से ताजा अपडेट लेना बेहतर रहेगा।
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हर की पौड़ी पर गंगा स्नान का क्या है धार्मिक महत्व?
हरिद्वार की हर की पौड़ी को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान का संबंध भगवान विष्णु के चरणों से जोड़ा जाता है। यहां गंगा में डुबकी लगाना, पूजा करना और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। ऐसी आस्था है कि श्रद्धा के साथ गंगा स्नान करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति मिलती है और उसके पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी वजह से पूर्णिमा, अमावस्या, गंगा से जुड़े पर्वों और पितृ पक्ष जैसे अवसरों पर हरिद्वार में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।