Vishakha Committee investigation: लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़ा यह मामला सिर्फ एक आपसी विवाद नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में भरोसे, नैतिकता और सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है। एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर की शिकायत पर बनी विशाखा कमेटी की रिपोर्ट में डॉक्टर रमीज मलिक के आचरण, झूठे दावों और कथित दबाव की परतें सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यह मामला व्यक्तिगत संबंधों से शुरू होकर मानसिक उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण के दबाव तक पहुंच गया।
आपसी सहमति का फैसला
विशाखा कमेटी की जांच में सामने आया कि दोनों रेजिडेंट डॉक्टरों को केजीएमयू परिसर के भीतर हॉस्टल आवंटित थे, लेकिन उन्होंने आपसी सहमति से कैंपस के बाहर रहने का निर्णय लिया। यह व्यवस्था प्रशासनिक अनुमति के बिना की गई थी, जिसे जांच में एक अहम तथ्य के तौर पर दर्ज किया गया। कमेटी ने इसे बाद की घटनाओं की पृष्ठभूमि समझने के लिए महत्वपूर्ण माना।
पीड़िता की आपबीती
पीड़िता ने बताया कि जुलाई 2025 में उसकी आरोपी डॉक्टर से दोस्ती हुई थी। सितंबर में उसे जानकारी मिली कि रमीज मलिक पहले से शादीशुदा हैं। इसके बाद जब उसने दूरी बनाने की कोशिश की, तो कथित तौर पर डराने-धमकाने और मानसिक दबाव का सिलसिला शुरू हुआ। पीड़िता ने पुलिस में जबरन धर्मांतरण की शिकायत दी, हालांकि विशाखा कमेटी के समक्ष उसने उत्पीड़न पर अधिक फोकस रखा।
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आरोपी के बयान
कमेटी के सामने पेश होने पर आरोपी डॉक्टर ने खुद को अविवाहित बताया, जो बाद में गलत साबित हुआ। वह केवल एक बार जांच में शामिल हुआ और इसके बाद अनुपस्थित रहा। उसके पिता ने भी प्रारंभ में शादी से इनकार किया। कमेटी ने इसे जांच में सहयोग न करने और तथ्य छिपाने की कोशिश के रूप में दर्ज किया।
आगे की कार्रवाई
जांच में आरोपी को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न का दोषी पाया गया। पहले से निलंबित डॉक्टर के खिलाफ अब निष्कासन की सिफारिश की गई है। पीड़िता को सुरक्षा, हॉस्टल आवास और अवकाश प्रदान किया गया है। यह मामला संस्थानों में आंतरिक शिकायत तंत्र की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करता है।