पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर के एक बयान ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी। मांजरेकर ने कहा था कि विराट कोहली ने टेस्ट क्रिकेट छोड़कर वनडे को चुना क्योंकि यह खेलने के लिहाज से सबसे आसान फॉर्मेट है। इस बयान के सामने आते ही क्रिकेट प्रशंसकों के साथ-साथ पूर्व खिलाड़ियों की भी प्रतिक्रियाएं आने लगीं। अब इस मामले में पूर्व भारतीय स्पिनर हरभजन सिंह खुलकर सामने आए हैं।
हरभजन सिंह ने क्यों जताई नाराजगी
हरभजन सिंह ने मांजरेकर की सोच को गलत और खिलाड़ियों की मेहनत को कम आंकने वाला बताया। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी स्तर पर क्रिकेट खेलना आसान नहीं होता। हरभजन के मुताबिक अगर रन बनाना इतना आसान होता, तो हर खिलाड़ी ऐसा कर पाता। उन्होंने कहा कि हमें उन खिलाड़ियों का सम्मान करना चाहिए जो लगातार अच्छा खेल रहे हैं, टीम को जीत दिला रहे हैं और दबाव में भी प्रदर्शन कर रहे हैं।
कोहली को बताया बड़ा मैच विनर
हरभजन सिंह ने विराट कोहली का खुलकर बचाव किया। उन्होंने कहा कि विराट चाहे एक फॉर्मेट खेलें या तीनों, वह हमेशा भारत के लिए बड़े मैच जीतने वाले खिलाड़ी रहे हैं। उनका मानना है कि विराट की निरंतरता और फिटनेस ही उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। हरभजन ने यह भी कहा कि अगर विराट आज भी टेस्ट क्रिकेट खेलें, तो वह टीम के सबसे अहम खिलाड़ियों में शामिल होंगे।
युवाओं के लिए कोहली की अहम भूमिका
हरभजन ने विराट कोहली को सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि कोहली जैसे खिलाड़ी आने वाली पीढ़ी को मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास का रास्ता दिखाते हैं। उनके अनुसार विराट ने भारतीय क्रिकेट को आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई है और उनके योगदान को किसी एक फॉर्मेट से नहीं तौला जा सकता।
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मांजरेकर ने क्यों कहा वनडे आसान
संजय मांजरेकर ने अपने बयान में कहा था कि वनडे क्रिकेट में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के लिए हालात आसान हो जाते हैं। उनका तर्क था कि फील्डिंग में ढील, गेंदबाजों का विकेट के बजाय रन रोकने पर ध्यान और लंबी पारी खेलने का मौका बल्लेबाजों को मदद देता है। उन्होंने यह भी कहा कि कई खिलाड़ी टेस्ट में मध्यक्रम में खेलने से खुश रहते हैं, लेकिन वनडे में ओपनिंग को तरजीह देते हैं।
बहस का निचोड़ क्या है
इस पूरे विवाद के बाद एक बात साफ है कि क्रिकेट को आसान या मुश्किल बताना नजरिए पर निर्भर करता है। हरभजन सिंह का मानना है कि हर फॉर्मेट की अपनी चुनौतियां होती हैं और खिलाड़ियों को उनके प्रदर्शन से आंका जाना चाहिए, न कि फॉर्मेट के आधार पर। फिलहाल यह बहस क्रिकेट प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, लेकिन विराट कोहली के कद और योगदान पर सवाल उठाना हर किसी को मंजूर नहीं है।