मध्यप्रदेश के हरदा में करणी सेना के जनक्रांति आंदोलन ने रविवार को बड़ा सियासी और प्रशासनिक संदेश दे दिया। हजारों की संख्या में जुटे लोगों ने नेहरू स्टेडियम को आंदोलन स्थल बना लिया, जहां सरकार के खिलाफ तीखे तेवर देखने को मिले। संगठन ने दोपहर 3 बजे तक सरकार को समय देते हुए चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
नेहरू स्टेडियम में उमड़ा जनसैलाब
21 दिसंबर से शुरू हुए करणी सेना के जनक्रांति आंदोलन में सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। नेहरू स्टेडियम में किसानों, युवाओं, महिलाओं और पूर्व सैनिकों की बड़ी मौजूदगी रही। नारेबाजी और भाषणों के बीच मंच से साफ संदेश दिया गया कि यह आंदोलन सिर्फ एक वर्ग का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक न्याय की लड़ाई है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, शहर छावनी में तब्दील
आंदोलन को देखते हुए प्रशासन ने हरदा में पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। प्रदर्शन स्थल से लेकर शहर के सभी प्रवेश और निकास मार्गों पर पुलिस बल तैनात है। बाहर से बुलाए गए जवानों के ठहरने के लिए करीब 30 होटल और धर्मशालाओं को कंट्रोल में लिया गया है। ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए भी निगरानी की जा रही है, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
20 हजार से ज्यादा किसान शहर में मौजूद
रविवार सुबह तक हरदा में 20 हजार से अधिक किसानों और समर्थकों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग आए हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह जनक्रांति लंबे समय से दबे मुद्दों की आवाज है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
21 सूत्री मांगों में क्या-क्या शामिल
करणी सेना परिवार ने सरकार के सामने 21 सूत्री मांगों का ज्ञापन रखा है। इसमें न्यायिक जांच, दर्ज मामलों की वापसी, आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया में सुधार, आर्थिक आधार पर आरक्षण, किसानों की समस्याएं, बिजली बिल और स्मार्ट मीटर से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अलावा शिक्षा, रोजगार, महिला सुरक्षा, गो-संरक्षण, पूर्व सैनिकों और मीडिया कर्मियों से जुड़े विषय भी शामिल हैं।
दोपहर 3 बजे तक का अल्टीमेटम
राष्ट्रीय अध्यक्ष शेरपुर ने मंच से कहा कि सरकार को दोपहर 3 बजे तक का समय दिया गया है। यदि सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन का स्वरूप और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा।