Haritalika Teej 2026: हरितालिका तीज का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन और अविवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसी कारण महिलाएं अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य और मनचाहे वर की कामना से यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना जाता है। यदि अनजाने में भी कुछ गलतियां हो जाएं तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होने में बाधा आ सकती है। आइए जानते हैं किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
पूजा-व्रत के नियमों में लापरवाही न करें
ज्योतिष एवं धर्मशास्त्र के जानकारों के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करना चाहिए। पूजा का शुभ मुहूर्त, भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत आराधना तथा संकल्प लेना महत्वपूर्ण माना जाता है। बिना संकल्प के व्रत शुरू करना, पूजा सामग्री अधूरी रखना या पूजा को जल्दबाजी में समाप्त करना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता।
इन गलतियों से बचने की दी जाती है सलाह
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरितालिका तीज पर सात प्रकार की भूलों से बचना चाहिए। इनमें व्रत के नियम तोड़ना, पूजा के दौरान क्रोध करना, असत्य बोलना, किसी का अपमान करना, सात्विकता का पालन न करना, पूजा सामग्री का अनादर करना और शिव-पार्वती की आराधना अधूरी छोड़ देना शामिल माना जाता है। इन बातों का उल्लेख विभिन्न धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में मिलता है।
सिर्फ निर्जला व्रत ही नहीं, मन की पवित्रता भी जरूरी
धार्मिक विद्वानों का कहना है कि हरितालिका तीज का महत्व केवल निर्जला व्रत रखने तक सीमित नहीं है। व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक माना जाता है। ईर्ष्या, कटु वचन, विवाद और नकारात्मक सोच से दूर रहकर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करने से व्रत का आध्यात्मिक महत्व बढ़ता है। श्रद्धा और संयम इस पर्व की मूल भावना माने जाते हैं।
आस्था के साथ करें व्रत, अंधविश्वास से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हरितालिका तीज का व्रत श्रद्धा, संयम और विश्वास का पर्व है। विशेषज्ञों का कहना है कि व्रत करते समय स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए और यदि किसी कारणवश निर्जला व्रत रखना संभव न हो तो परिवार या योग्य आचार्य की सलाह ली जा सकती है। पूजा पूरे मनोयोग से करें, दान-पुण्य और सेवा को महत्व दें तथा धार्मिक परंपराओं का सम्मान करें। ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और नियमों के पालन से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है और व्रत का आध्यात्मिक फल भी पूर्ण रूप से मिलने की संभावना बढ़ती है।