
हरियाली तीज 2025: हरियाली तीज का पर्व श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह दिन विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण होता है, जो अपने पति की लंबी उम्र और सुखमय दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व पर मायके से बेटियों को ‘सिंजारा’ भेजने की परंपरा है, जिसमें साज-सज्जा की वस्तुएं, मिठाइयाँ, वस्त्र और श्रृंगार का सामान शामिल होता है। वर्ष 2025 में हरियाली तीज 30 जुलाई को मनाई जाएगी। इस शुभ अवसर पर यदि आप अपनी बेटी या बहन को सिंजारा भेज रहे हैं, तो कुछ खास बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है, अन्यथा अनजाने में की गई छोटी-सी भूल रिश्तों में खटास ला सकती है।
क्या है सिंदाराका महत्व?
सिंजारा, हरियाली तीज से एक दिन पहले भेजा जाता है, जिसमें माता-पिता अपनी बेटी के लिए स्नेह और आशीर्वाद के रूप में उपहार भेजते हैं। यह एक प्रकार का भावनात्मक और सांस्कृतिक बंधन होता है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है।
इन चीजों को न रखें सिंजारे में
फटी या पुराने कपड़े
कभी भी सिंजारे में पुराने या प्रयुक्त वस्त्र न भेजें। यह अपशकुन माना जाता है और रिश्तों में दूरी ला सकता है।
नमक या मिर्च जैसे कड़वे या तीखे सामान
सिंजारे में हमेशा मीठी और शुभ वस्तुएं भेजी जाती हैं। नमक या मिर्च जैसी चीजों को प्रतीकात्मक रूप से रिश्तों में कड़वाहट का कारण माना जाता है।
काले रंग की वस्तुएं
तीज एक शुभ और हर्षोल्लास का पर्व है। काले रंग को अशुभ माना जाता है, इसलिए कपड़ों या सजावट में काले रंग से परहेज़ करें।
नकली या टूटी हुई श्रृंगार की वस्तुएं
सिंजारे में भेजे गए चूड़ी, बिंदी, कंघी या कंगन यदि टूटे या खराब हों, तो इसे अशुभ माना जाता है।
यह भी जानें
हरियाली तीज पर सिंजारा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भावनाओं का आदान-प्रदान है। अगर इसे पूरे मन और शुद्धता से भेजा जाए, तो यह रिश्तों में मिठास बढ़ाता है। लेकिन यदि लापरवाही या अशुभ वस्तुएं शामिल हो जाएँ, तो वही परंपरा तनाव का कारण बन सकती है। इसलिए इस तीज पर, बेटी को भेजें स्नेहभरा और शुभता से भरा सिंजारा – ताकि रिश्तों में हमेशा बनी रहे हरियाली!