Why is Hariyali Teej Celebrated: हरियाली तीज हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसका महिलाओं को पूरे साल बेसब्री से इंतजार रहता है। सावन के मौसम में आने वाला यह पर्व प्रकृति की हरियाली के साथ-साथ दांपत्य जीवन में प्रेम, समर्पण और विश्वास का संदेश देता है। इस अवसर पर महिलाएं व्रत रखती हैं, भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और सोलह श्रृंगार करके इस पर्व को मनाती हैं। हरे रंग के वस्त्र, चूड़ियां और मेहंदी भी इस दिन की खास पहचान मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं में हरियाली तीज का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव के दिव्य मिलन से जोड़ा जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने लंबे समय तक कठोर साधना की थी। उनकी इसी अटूट भक्ति और तपस्या की कथा हरियाली तीज के महत्व को और खास बना देती है।
भगवान शिव को पाने का लिया संकल्प
पौराणिक कथा के मुताबिक, माता पार्वती के मन में बचपन से ही भगवान शिव को अपना जीवनसाथी बनाने की इच्छा थी। समय बीतने के साथ जब उनका विवाह करने की बात चली, तब उनके पिता पर्वतराज हिमालय उनके लिए योग्य वर की तलाश करने लगे। इसी दौरान देवर्षि नारद हिमालय के पास पहुंचे। उन्होंने माता पार्वती के विवाह के लिए भगवान विष्णु का नाम सुझाया। पर्वतराज को यह प्रस्ताव उचित लगा और उन्होंने विवाह के लिए सहमति भी दे दी। जब यह बात माता पार्वती को मालूम हुई तो वह बेहद व्यथित हो गईं, क्योंकि उनका मन पहले ही भगवान शिव को अपना पति मान चुका था।
जंगल में जाकर शुरू की कठिन साधना
भगवान शिव को प्राप्त करने की इच्छा से माता पार्वती ने सांसारिक सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया। वह एकांत स्थान पर चली गईं और महादेव की आराधना में लीन हो गईं। मान्यता है कि उन्होंने कई वर्षों तक अत्यंत कठिन तप किया। कथा में बताया जाता है कि माता पार्वती की साधना करीब 108 वर्षों तक चली। इस दौरान उन्होंने अनेक कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनकी आस्था भगवान शिव के प्रति कभी कमजोर नहीं हुई। वह पूरी श्रद्धा के साथ अपनी साधना में जुटी रहीं और मन में यही विश्वास रखा कि उनकी भक्ति एक दिन जरूर सफल होगी।
महादेव ने स्वीकार किया माता पार्वती का प्रेम
माता पार्वती की कठोर साधना और अटूट समर्पण से भगवान शिव प्रसन्न हुए। इसके बाद उन्होंने माता पार्वती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करने की सहमति दी। इसी घटना को शिव और पार्वती के दिव्य मिलन से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि से इस प्रसंग का संबंध है और इसी वजह से हरियाली तीज का पर्व सुहाग, प्रेम और वैवाहिक सुख की कामना से जुड़ गया। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। वहीं अविवाहित युवतियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से व्रत और पूजा करती हैं।
हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?
हरियाली तीज को लेकर कई बार हरतालिका तीज से भ्रम हो जाता है। दोनों पर्वों का संबंध माता पार्वती और भगवान शिव से है, लेकिन इनके अवसर और कथाएं अलग मानी जाती हैं। हरियाली तीज सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाई जाती है। वहीं हरतालिका तीज भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। हरतालिका तीज की कथा में भी माता पार्वती की भगवान शिव को पाने के लिए की गई तपस्या का वर्णन मिलता है।