
टीम इंडिया की ऐतिहासिक जीत के बाद डीवाई पाटिल स्टेडियम में कुछ ऐसे नज़ारे दिखे, जिन्होंने हर हिंदुस्तानी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया. 47 साल के लंबे इंतजार के बाद भारत की बेटियों ने पहली बार वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम किया. हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में हिंद की शेरनियों ने साउथ अफ्रीका को 52 रनों से हराकर इतिहास रच दिया. जीत का आखिरी विकेट गिरते ही हरमनप्रीत और स्मृति मंधाना ने तिरंगे में लिपटकर वो पोज दिया जिसने सोशल मीडिया पर आग लगा दी. दोनों के कंधे पर झंडा था, आंखों में आंसू और चेहरे पर गर्व की मुस्कान. ये वही पोज था जो विराट कोहली और रोहित शर्मा ने 2024 टी20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद दिया था.
शेफाली-दीप्ति ने दिखाया तूफान
इस ऐतिहासिक जीत की कहानी दो नामों से शेफाली वर्मा और दीप्ति शर्मा शुरू हुई. शेफाली यानी “लेडी सहवाग” ने अफ्रीकी गेंदबाजों पर हमला बोल दिया. उन्होंने सिर्फ 87 रनों की तूफानी पारी खेली जिसमें 7 चौके और 2 छक्के शामिल थे. हर गेंद पर उनका आत्मविश्वास और स्ट्राइक रेट ने बता दिया कि अब भारतीय बेटियां किसी से कम नहीं। वहीं दीप्ति शर्मा ने बल्ले से 58 रन ठोके और गेंद से अफ्रीका की पूरी बल्लेबाजी उखाड़ दी. 9.3 ओवर में 5 विकेट लेकर उन्होंने मैच को एकतरफा बना दिया. यही नहीं, पूरे टूर्नामेंट में 22 विकेट लेकर वो प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट बनीं और इतिहास रच दिया। दीप्ति का नाम अब विश्व क्रिकेट की सबसे सफल ऑलराउंडर्स में शुमार हो गया है.
मैदान में छलक पड़े रोहित के आंसू
जैसे ही हरमनप्रीत की टीम ने जीत दर्ज की, स्टेडियम में मौजूद हर चेहरा भावुक हो उठा. रोहित शर्मा की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े. उनके बगल में खड़े जय शाह भी उस पल को देखकर हैरान रह गए. सचिन तेंदुलकर खड़े होकर बेटियों को सैल्यूट करते नजर आए, हरमनप्रीत और मंधाना की जोड़ी ने वो किया जो कभी सोच से परे था. मंधाना ने इस मैच में 45 रन बनाए और फील्डिंग में दो कमाल के कैच पकड़कर सबका दिल जीत लिया. जीत के बाद जब उन्होंने हरमनप्रीत को गले लगाया, तो पूरा स्टेडियम भारत माता की जय से गूंज उठा.
सोशल मीडिया पर तारीफ
भारत की ये जीत सिर्फ एक ट्रॉफी नहीं, बल्कि एक युग की शुरुआत है सोशल मीडिया पर हर जगह बस हरमन, मंधाना, शेफाली और दीप्ति का नाम छाया हुआ है दीप्ति की तस्वीरों पर लोगों ने लिखा अब भारत की गेंदबाजी की पहचान सिर्फ बुमराह नहीं, दीप्ति शर्मा हैं. इस जीत ने 2005 और 2017 की अधूरी कहानी को पूरा कर दिया। 47 साल के इंतजार के बाद भारत ने वो कर दिखाया जो कभी असंभव लगता था.